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आडवाणी के राष्ट्रपति बनाये जाने के पीछे ये है सच्चाई, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

लालकृष्ण आडवाणी बनेगे राष्ट्रपति

नई दिल्ली (रिपोर्ट अड्डा): 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजों की चर्चा थमी भी नहीं कि आजकल लाल कृष्ण आडवाणी के राष्ट्रपति बनाये जाने की चर्चा तेज हो रही है। चुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद ये तो साफ है कि देश का अगला राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति BJP की पसन्द का होगा।

जुलाई 2017 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए 8 मार्च को सोमनाथ ट्रस्ट की बैठक अपने इतिहास में पहली बार सोमनाथ में हुई। इसमें प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह और वरिष्ठ भाजपाई नेता आडवाणी जी, केशुभाई पटेल जैसे नेता शामिल थे। इस बैठक के बाद ऐसे संकेत मिल रहे है कि आडवाणी जी को गुरु दक्षिणा के रूप में राष्ट्रपति बनाया जा सकता है। माना जा रहा है कि इसी बैठक में मोदी ने संकेत दिये कि अगर यूपी चुनाव के नतीजे BJP के पक्ष में रहे तो आडवाणी को राष्ट्रपति बनाया जाय।

सोमनाथ का BJP और आडवाणी के राजनीतिक सफर में अहम स्थान है। यहीं से आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या की रथयात्रा शुरू की थी। जिसके सारथी स्वयं नरेंद्र मोदी थे। यही से मोदी के राजनीतिक कैरियर की शुरुआत हुई थी। मोदी को गुजरात का सीएम बनाने के पीछे भी आडवाणी का योगदान था। BJP नेता इस बात से इनकार कर रहे है कि बैठक में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर कोई चर्चा भी हुई थी। लेकिन, इसके बावजूद इस बात की अटकलें तेज है।

मोदी और आडवाणी के बीच की दूरियां किसी से छिपी नहीं है। यही वजह है कि आडवाणी के राष्ट्रपति बनाये जाने की बात सुर्खियों में है। उल्लेखनीय बात यह है कि बैठक से ठीक एक दिन पहले आडवाणी सोमनाथ पहुँच चुके थे। उसके बावजूद वे न तो प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में पहुँचे और न ही BJP नेताओं के साथ सोमनाथ मंदिर में पूजा करने पहुँचे।

आडवाणी को राष्ट्रपति बनाये जाने के पीछे के तथ्यों पर नजर डाले तो हो सकता है की कि आडवाणी की वरीयता को पार्टी में स्थान मिल रहा।वो पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता है। दूसरी ओर अगर आडवाणी राष्ट्रपति बनते है तो मोदी और शाह पार्टी के अंदरुनी मामलों में उनकी दखलंदाजी से बच जायेगे।

दूसरी वजह ये भी हो सकती है कि पार्टी में मोदी का बढ़ा हुआ कद जिन्हें खल रही है वो आडवाणी से मोदी और शाह की शिकायत करते रहते है। राष्ट्रपति बनते ही ऐसे लोगों से आडवाणी दूर हो जायेगे। जो मोदी के पक्ष में होगा। संसदीय बोर्ड का सदस्य न होने के बावजूद पार्टी में उनकी राय सुनी जाती है। अब देखना यह है कि प्रधानमंत्री बनने के लिए आडवाणी ने अयोध्या यात्रा शुरू की थी। उस यात्रा के सारथी वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी आडवाणी को राष्ट्रपति की कुर्सी तक की यात्रा के सारथी बनते है या नहीं।

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