राज्य

सच तो ये है !

This is the Fact MayaWati

बात BSP के सुप्रीमो माया वती के भाई आनंद कुमार के खाते में जमा104 करोड़ की नही है ?
बात है कि सभी पार्टियां भागती क्यू है RTI के दायरे में आने से ?

यहाँ जनता की बातों को कोई नही सुनता , उन के दर्द को कोई नही देखता क्यू की बात अपने स्वर्थ की है !
बात जब पार्टियों को चंदे में मिलने वाले फंड की होती है तो सभी पार्टियां अपनी अपनी बगले झांकने लगती है । चाहे वो BJP हो , कांग्रेस , बसपा , सपा,TMC, लेफ्ट, JDU, RJD, AIADMK, DMK, शिवसेना, या यह कह ले जितनी भी पार्टियां है भारत में राजनीति की सभी का यही हाल है कोई भी अपने पार्टी में आये चंदे के रुपयों का हिसाब नही देना चाहता है ।
जब भी कोई पत्रकार इस पे सवाल पूछता है किसी भी पार्टी के नेताओ से तो उन का एक ही जबाब होता है ।
जी मेरा तो सारा हिसाब चुनाव आयेग के बेवसाइड पे पड़ा है आप खुद देख लो जी ।
क्या यह कहना उचित है ?
जिस जनता की नुमाइंदगी की आप बात करते है उस को आप सीधा जबाब नही दे सकते क्या ? क्या जनता को ऐसे मुर्ख बनाना यही राजनीति है ?

अभी Dimonetaizetion के कारण जितनी भी पार्टियां चीख चीख कर सरकार से रोल बैक की बात कर रही है , उस से जनता को समझ आने लगा है कि असली खेल तो इन जैसे राजनेता खेल रहे जिनकी काली कमाई अब किसी काम की नहीं रह गई है ,
DRA के रिपोर्ट के अनुसार इस बार यूपो के विधानसभा चुनाव में 1000 करोड़ का काला धन का इस्तेमाल होता है । ये रुपया आखिर कहा से आता ? ये रुपया चुनाव में खर्च करने के लिए राजनितिक पार्टियों को कौन देने वाला था ?

इस का जबाब किसी के पास नही है ! अगर जनता की परेशानी को आगे रख कर ये पार्टियां अपना उल्लू सीधा करना चाहती है ।
अभी 1000 और 500 के नोट को बंद हुए 50 दिन नही हुआ है , बैंक और ATM में लाइनें कम होने लगी है 8 नवम्बर से अभी तक बहुत बदलाव आ चुका है । इक्का- दुक्का को छोड़ कर
कही से कोई विरोध का स्वर नही दिख रहा है

विपकक्ष इस बात को समझने लगा है कि कही हमारे हाथ से ये मुद्दा भी ना छीन जाये जिस कारण सारा विपकक्ष एक साथ जोर लगा कर सरकार को घेरने में लगा है । लेकिन अब ऐसा लगता है कि सरकार इस मुद्दे को अपने हाथ से जाने देगी । नोटबंदी के बाद हुए चारो निकाय चुनाव में जनता ने बीजेपी को वोट किया है और हर जगह बीजेपी को जीत मिली है ऐसे में सरकार भी देख रही है कि उस के फैसले को जनता सकारात्मक रूप में ले रही है ।

ऐसे में यूपी और पंजाब में विपक्षी पार्टियों को सरकार के खिलाप कोई जोरदार मुद्दा हाथ लगता नजर नही आ रहा है ऐसे सभी पार्टियां इस मुद्दे को भुनाना चाहती है जो की सायद अब संभव नही लग रहा है ।

देखा जाय तो यही वह उचित समय है अगर विपक्षी पार्टियां मिल कर सरकार के ऊपर ये दवाव बनाये और कहे की सभी पार्टियों को RTI के दायरे में लाया जाए । लेकिन ये तो बस ख्याली पुलाव है जो कभी पूरा होने वाला नही है ।
पार्टियां कोई भी बस हर बार जनता ही ठगी जाती है । सरकारे आती है जाती है लेकिन चुनाव में हार हर बार जनता की होती है किसी भी पार्टी को जनता की हितों की चिंता नहीं होती है ।

अगर चिंता होती है राजनीती पार्टियों को तो बस अपने वोट बैंक की और अपने फायदे की ।
ये लेखक के अपने विचार है ।

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