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बदहाल सड़कों का परमानेंट इलाज ढूंढा इस भारतीय ने, खुद भर जाएंगे सड़कों के गड्ढे

streets will be filled pit himself

नई दिल्ली (रिपोर्ट अड्डा): हमारे देश के सड़को की हालात किसी से छुपी नहीं हैं। सड़कें कम गड्ढे ज्यादा हैं। सड़क पर गाड़ी चलाना किसी जंग को जीतने से कम नहीं। सड़कों में गड्ढों के अलावा भी अनेकों समस्या हैं जैसे Bad riding quality , Poor geometries और insufficient pavement thickness

रोज सड़कों की मरम्मत की जाती हैं और रोज़ सड़के बदहाल स्थिति में पहुँच जाती हैं। गाँवों में तो आज भी सड़के देखने को नहीं मिलती। जबकि रोटी, कपड़ा और मकान की तरह सड़के भी हमारी मुख्य जरूरत में शामिल हैं।
इस बदलते दौर में इस समस्या का समाधान ढूंढा हैं भारत के एक प्रोफेसर नेमकुमार बंतिया ने। प्रोफेसर बंतिया ने बदहाल सड़कों का Permanent solution खोजा हैं। नेमकुमार ने ऐसे सड़कों की तकनीकी खोजी हैं जिससे सड़कें अपना मरम्मत खुद करती हैं। उन्होनें अपनी तकनीक को आजमा कर भी देखा हैं।

Delhi IIT के student रहे नेमकुमार बंतिया फिलहाल कनाडा के यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया में डिपार्टमेंट ऑफ सिविल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर हैं। उन्होनें सड़कों की हालात पर रिसर्च किया हैं।

कनाडा इंडिया रिसर्च सेंटर ऑफ एक्सलेंस ‘आईसी-इमपैक्ट्स’ के सानिध्य में नेमकुमार ने भारतीय सड़कों की स्थिति सुधारने का काम शुरू कर दिया हैं। बेंगलोर से 90 km दूर स्थित गाँव में एक प्रोजेक्ट के जरिये सड़कों की निर्माण का काम शुरू किया हैं।

उन्होंने इ्को फ्रेंडली सड़कों का निर्माण करवाया हैं। जिसमें ज्यादा खर्चा भी कम होता हैं। इसमें सीमेंट का कम उपयोग होता हैं। उसकी जगह राख का उपयोग होता हैं। सीमेंट के कम उपयोग से ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन में कमी आती हैं।

ये सड़कें नैनो कंक्रीट तकनीक पर based हैं। इसमें कंक्रीट को फाइबर के साथ नैनो कोटिंग से जोड़ा जाता हैं। इस कारण ये सड़कें पानी सोखते ही गढ़ें खुद ही भर जायेंगे।

इन सड़कों के निर्माण में अनहाईड्रेटेड सीमेंट का use किया जाता हैं। जिससे बरसात में पानी के संपर्क में आने पर आस-पास इसका फैलाव होने से गड्ढे अपने आप भर जायेंगे। इसमें हाईड्रोफिलिक का भी सहारा लिया जाता हैं।

बेंगलोर क पास नेमकुमार द्वारा बनाया गया सड़क आज भी एक साल होने पर भी वैसी ही है जैसे निर्माण के वक़्त थी। इस सड़क की मोटाई सामान्य सड़क से 60% कम तक होती हैं। नेमकुमार के according ये सड़के कम से कम 15 साल तक चलती हैं।
अगर इसे हमारे देश में लागू किया जाय तो 24 लाख km सड़क की हालात काफी हद तक सुधर जायेगी।
देश का आवागमन देश के विकास में मुख्य भूमिका निभाता हैं। अच्छी सड़कों से आने जाने मे सुविधा तो होती ही हैं। साथ ही यह जेब के लिये भी किफायती होता हैं।

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