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सरकार के इस फैसले से Operator Company को भी होगा फायदा, Customer को भी मिलेगा लाभ !

Modi सरकार के दूरसंचार मंत्री के नए फैसले के बाद जल्द ही आपके मोबाइल फोन के बिलों में कटौती होने वाली है, क्योंकि सराकार के नए फैसले के बाद Call दरों में कमी होने जा रही है. दरअसल सरकार ने जो फैसला लिया है कि SUC यानी स्पेक्ट्रम यूजेज चार्जेज में कमी किया जाएगा. सरकार अजस्टड ग्रॉस रेवेन्यू के पांच पर्सेंट को स्पेक्ट्रम यूजेज चार्जेज के तौर पर लेती थी, जिसे अब तीन पर्सेंट ही करने की तैयारी है. इससे कर्ज से परेशान Mobile सर्विस Operatorकंपनियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. यही नहीं कंपनियां इस राहत को आम लोगों तक भी पहुंचा सकती हैं.

कंपनियों को 3,200 करोड़ की बचत होने का अनुमान !

सरकार अपने इस नए फैसले के तहत जुलाई में 2,000 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम की नीलामी करीब 7 फ्रीक्वेंसीज पर करेगी. इससे पहले ये फैसला इंडस्ट्री के लिए बूस्टर साबित हो सकता है. सरकार के इस फैसले से Mobile कंपनियों को करीब 3,200 करोड़ रुपये की भारी बचत होने का अनुमान है. सरकार से जुड़े सूत्रों की मानें तोSUCको कम करने का फैसला अंतरमंत्रालयी टेलिकॉम आयोग से मंजूर हो चुका है. इससे आयोग की बैठक मार्च के आखिरी सप्ताह में हुई थी. बस इस को लेकर अंतिम रुप रेखा बनाया जाना है

SUC को कम करने की मांग उठाते रहे हैं ऑपरेटर्स

टेलिकॉम ऑपरेटर्स की तरफ से कई बार एसयूसी को कम करने की मांग उठाई जाती रही है. उनकी इस मांग का ट्राई ने भी समर्थन किया था. अब ‘टेलिकॉम कमिशन के एसयूसी में कटौती को मंजूरी दिये जाने की खबर से टेलिकॉम ऑपरेटर्स राहत की सांस ले रहे हैं. इसके अलावा दूरसंचार मंत्री ने भी इस फैसले पर आगे बढ़ने पर सहमति जता दी है. टेलिकॉम कंपनियों के सालाना अजस्टड ग्रॉस रेवेन्यू में से सरकार जो हिस्सा लेती है, उसे एसयूसी कहा जाता है। फिलहाल ये पांच पर्सेंट है. एसयूसी में कमी करने का सबसे बड़ा लाभ मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम को मिल सकता है, जो जल्दी ही टेलिकॉम सेवाएं ऑफर करने की तैयारी में है.

कॉल ड़्राप से राहत कब ?

सरकार के नए फैसले से जाहिर तौर पर टेलिकॉम ऑपरेटर्स को सीधा फायदा होगा, लेकिन माना जा रहा है कि कंपनिया इसका फायदा अपने ग्राहकों तक भी पहुंचाएगी.लेकिन फिलहाल सबसे बड़ी परेशानी Call ड्राप को लेकर है. जिस पर फिलहाल कोई हल निकलता दिख नहीं रहा. तामा टेलिकॉम ऑपरेटर कंपनिया पहले ही अपने हाथ खड़े कर दिये हैं, और इसका खामियाजा उपभोक्ताओं को उठाना पड़ रहा है, वो उपभोक्ता जो पूरे पैसे सर्विस के नाम पर चुकाते हैं

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