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शहाबुद्दीन का बाहर आना, लालू का बिहार सरकार पर व्यापक प्रभाव का उदाहरण !

Shahabuddin come out , examples of significant impact on the Government of Bihar Lalu

नई दिल्ली (ब्यूरो, रिपोर्ट अड्डा): टीवी की ब्रेकिंग न्यूजों से लेकर, गली मोहल्लों की चर्चाओं तक एक ही मुद्दा है। जेल से निकले शहाबुद्दीन की ताकत की नुमाईश। 11 साल बाद अधिकारिक तौर पर खुली हवा में सांस लेते शहाबुद्दीन बिहार के शासन और प्रशासन को बाहुबली होने के मायने बता रहे हैं। शहाबुद्दीन के काफिले में करीब-करीब 1000 चार चक्का वाहन रेला निकाल रहे थे। शहाबुद्दीन जेल से निकलकर आखिर किसको अपनी ताकत का एहसास करा रहे थे।

शहाबुद्दीन जिस प्रकार से अपनी ताकत की नुमाईश कर रहे हैं। वो साफ कर रहा है कि वो न सिर्फ आजाद हो गए हैं, बल्कि सत्ता का सपोर्ट भी मिला हुआ है। बिहार के भागलपुर से लेकर सीवान तक उन रिहाई का जश्न मनाया जा रहा है। भागलपुर में जश्न इसलिए मनाया जा रहा है क्योकि भागलपुर में वो कैद थे, तो सीवान शहाबुद्दीन का किला माना जाता रहा है।

बिहार में जितने लोग शहाबुद्दीन की आजादी का जश्न मना रहे हैं उतने ही लोग खौफजदा भी हैं। क्योकि ये, वो शहाबुद्दीन है जिस पर 39 आपराधिक मामले दर्ज हैं। जिसमे 2004 का वो मशहूर तेजाब कांड भी शामिल  है, जिसकी चर्चा ने पूरे बिहार की कलई खोल दी थी। नीतीश कुमार के शासन में शहाबुद्दीन को जेल में डाला गया था। नीतीश कुमार के ही शासन में शहाबुद्दीन बाहर आ रहे हैं । उन दोनों शासनों में एक फर्क है। उस फर्क को लालू कहते हैं।

तेजाब कांड में राजीव रौशन नाम के गावह के बयान के बाद शहाबुद्दीन को सलाखों के पीछे डाला गया था। राजीव रौशन की गोली मारकर हत्या की जा चुकी है, इसी मामले में शहाबुद्दीन को राहत भी मिली है। शहाबुद्दीन की लालू से करीबियत पुरानी मानी जाती है। शहाबुद्दीन लालू की पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी हैं।

हालांकि कोर्ट के फैसले पर टिप्पणी नहीं की जा सकती लेकिन नीतीश और लालू के राज में शहाबुद्दीन का यूं बाहर आना और खुलेआम अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना इस बात का संकेत है कि लालू का बिहार सरकार पर व्यापक प्रभाव है। जिस नीतीश ने बिहार में सुशासन का दिया जलाने के लिए शहाबुद्दीन को सलाखों के पीछे भेजा था। उसी नीतीश सरकार में लालू की पार्टी का कद्दावर नेता अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर रहा है।   

ये उन लोगों के लिए कठिनाई भरा वक्त है जो लोग शहाबुद्दीन के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे थे। और अब तक ये मान कर चल रहे थे कि नीतीश राज में वो सुरक्षित है। शहाबुद्दीन का जेल से निकलना पहला पड़ाव है। इसके बाद तो बिहार में तनाव बढ़ना दूसरा पड़ाव हो सकता है। अगर ऐसा होता है नीतीश की वो सियासी जमीन दरक जाएगी, जिस पर खड़े होकर नीतीश पीएम पद की कुर्सी का सपना देख रहे हैं।

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