kumar-vishwas-narendra-modi

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रिपोर्ट अड्डा (नई दिल्ली) : देश में काले धन को लेकर चर्चा हो रही है। 8 नवंबर की रात को प्रधानमंत्री मोदी ने ऐतिहासिक फैसला लिया। काले धन पर लगाम लगाने के लिए पीएम मोदी ने 1000 और 500 रूपये के नोटों को बैन कर दिया। पूरे देश में हंगामा मच गया। बैंकों में पुराने नोट बदलवाने के लिए लाइन लगने लगी। एटीएम से कैश निकालने के लिए भी घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है। सारी समस्याओं को झेलते हुए भी जनता ने सरकार के कदम की तारीफ की है। लेकिन कुछ सियासी दल इसका विरोध कर रहे हैं। इनमें सबसे मुखर अरविंद केजरीवाल हैं।अरविंद केजरीवाल की राजनीति की बुनियाद ही भ्रष्टाचार और काले धन की खिलाफत थी।

इसी के दम पर वो आंदोलनकारी से दिल्ली के सीएम की गद्दी तक पहुंचे। लेकिन अब वही केजरीवाल बदल चुके हैं। वो नेता बन गए हैं। सरकार ने काले धन के खिलाफ एक्शन लिया तो तकलीफ केजरीवाल को हो रही है। वो सरकार से इस फैसले को बदलने की मांग कर रहे हैं। केजरीवाल जनता के कंधे पर बंदूक रख कर मोदी सरकार पर निशाना साध रहे हैं।

अरविंद केजरीवाल ने काले धन पर पीएम मोदी की कार्रवाई का विरोध करके खुद को एक्सपोज कर दिया है। जनता हैरान है कि काले धन पर एक्शन लेने की बात करने वाले केजरीवाल अब एक्शन होने परल नाराज क्यों हैं। उनका ये रूप देखकर उन्ही के साथी कुमार विश्वास का भरोसा केजरीवाल से उठता दिख रहा है।

कुमार विश्वास काफी दिनों से चर्चा से गायब हैं। वो कवि हैं, अपने कार्यक्रममों में व्यस्त रहते हैं। लेकिन अब सुगबुगाहट हो रही है कि कुमार विश्वास केजरीवाल से नाराज हैं। केजरीवाल का काले धन के खिलाफ सरकार की कार्रवाई का विरोध करना कुमार विश्वास को समझ नहीं आ रहा है।कुमार विश्वास आम आदमी पार्टी के बड़े नेता हैं। पार्टी के जनाधार वाले नेताओं में से एक माने जाते हैं। लेकिन अब उन्हे लग रहा है कि आम आदमी पार्टी अपने सिद्धांतों से हट गई है। काला धन और भ्रष्टाचार को रोकने की बात करने वाली पार्टी अब खुद भ्रष्टाचार और ब्लैक मनी को लेकर गंभीर नहीं है। यही कारण है कि कयास लगाए जा रहे हैं कि कुमार विश्वास बहुत जल्द आम आदमी पार्टी से नाता तोड़ सकते हैं। कुमार विश्वास नरेंद्र मोदी की तारीफ कई मौकों पर कर चुके हैं। ऐसे में इस बात की अटकलें लगाई जा रही हैं कि वो बहुत जल्द केजरीवाल की सबसे बड़ी दुश्मन पार्टी का दामन थाम सकते हैं।

कुमार को जानने वाले भी मानते हैं कि ये एकदम सही समय है कुमार के लिए अपना प्राथमिकताएं बदलने का। पीएम मोदी पर भले ही कितने आरोप लगा लो, लेकिन एक बात तो है कि जनता काले धन के खिलाफ की गई सर्जिकल स्ट्राइक का समर्थन कर रही है। एक सर्वे के मुताबिक 82 फीसदी लोग 1000 और 500 के नोट बंद करने को सही मानते हैं। ऐसे में कुमार विश्वास को तय करना है कि वो काले धन पर एक्शन से बौखलाए केजरीवाल का साथ देंगे या फिर नरेंद्र मोदी की जय-जयकार करेंगे।

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