himalaya 1

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भारत में आयुर्वेद और जड़ी बूटियों का काफी महत्व है। हमारे ऋषि मुनी सदियों से खोज करते रहे हैं। जंगलों में जो जड़ी बूटियां पाई जाती हैं उसके महत्व के बारे में दुनिया को बताने में लगे हुए हैं। इसी तरह की एक खास औषधि अब हिमालय के जंगलों से मिली है। पत्थर की दिखने वाली ये औषधि चमत्कारी गुणों से लैस है। इसका सबसे खास गुण तो यह है कि हमारी उम्र को रोक सा लेता है। इस औषधि को शिलाजीत कहते हैं। ये पत्थर की तरह होती है। प्राचीन वैदिक ग्रथों में कहा गया है कि पत्थर से शिलाजीत बनता है।

सूरज की गर्मी से पहाड़ों की चट्टानें पिघलने लगती हैं। उन्ही चट्टानों से शिलाजीत बनता है। शिलाजीत दिखने में बहुत काला और चारकोल की तरह होता है। इसके सेवन से बूढ़े इंसान में भी 20 वर्ष के जवान की तरह ताकत आ जाती है। शिलाजीत स्वाद में कसैला, गर्म और बहुत कड़वा होता है। बता दें कि शिलाजीत चार तरह का होता है। स्वर्ण, रजत, ताम्र और लौह । शिलाजीत प्रयोग करते समय भी अधिक खटाई और मिच मसालों के सेवन से बचना पढता है |

बता दें कि शिलाजीत का प्रयोग करने से तनाव को पैदा करने वाले हार्मोंस संतुलित हो जाते हैं जिससे टेंशन की समस्या खत्म हो जाती है। शिलाजीत में अधिक अधिक मात्र में विटामिन और प्रोटीन होते हैं। जिसकी वजह से शरीर में उर्जा का संचार होता है। शिलाजीत खाने से जोड़ों का दर्द और गठिया की समस्या दूर हो जाती हैं, साथ ही हड्डियां भी मजबूत हो जाती हैं। इस में बल्डप्रेशर सामान्य करने का भी गुण होता है। ये शरीर में खून को साफ करके नसों में रक्तसंचार को ठीक करता है।

शिलाजीत का सबसे खास गुण ये है कि ये बुढ़ापा रोक देता है। उम्र बढ़ने के साथ झुर्रियों का आना आम बात है ऐसे में सफेद मसूली, अश्वगंधा और शिलाजीत को मिलाकर बनाई गई दवा का प्रयोग करने से जवानी फिर से लौट आती है। हालांकि शिलाजीत बेहद फायदेमंज होती है लेकिन इसका ज्यादा सेवन खतरनाक भी हो सकता है। इस से कई तरह के नुकसान हो सकते हैं। गर्भावस्था में इसका सेवन डॉक्टर की सलाह पर किया जाना चाहिए। कुल मिलाकर ये कुदरत का तोहफा है इंसानों के लिए, इसका सही इस्तेमाल वरदान है तो गलत प्रयोग किसी श्राप से कम नहीं है।

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