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4 कारण: देखते ही देखते पीएम मोदी ने पाकिस्तान को पीछे धकेल दिया

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अब कश्मीर बैकफुट पर है। पाकिस्तान बलूचिस्तान के मसले पर वार पलटवार कर रहा है। कश्मीर के मसले पर खुद बात के लिए आमंत्रित कर रहा है।

नई दिल्ली (ब्यूरो, रिपोर्ट अड्डा) : पाकिस्तान से भारत के रिश्ते अब अलग पड़ाव पर जाते दिखाई दे रहे हैं। पिछले 26 महीनों में पीएम मोदी की कूटनीति का असर ऐसा हुआ कि न सिर्फ पाक के नापाक इरादे बे-पर्दा हो गए बल्कि कश्मीर मामले को लेकर पाक बैकफुट पर भी आ गया।

1-दुनिया के आगे पाक के नापाक इरादे बेपर्दा किए

यूएन का भाषण हो या फिर सार्क देशों की बैठक, पीएम मोदी आतंक विरोधी एजेंडों को वैशविक मंच पर रखते रहे। साथ ही वो हर मंच से आतंक समर्थित देशों पर भी टिप्पणियां करते रहे। जिसका सीधा असर पाकिस्तान की बौखलाहट के रूप में देखने को मिलता रहा। जो पाकिस्तान दुनिया के आगे खुद को बेकसूर दिखाता रहा वो आज ब्पर्दा हो चुका है। चीन ने भी अपने फायदे के लिए पीक का इस्तेमाल करना चाहा लेकिन बिगड़ते माहौल को देखते हुए उसे भी अपने कदम पीछे करने पड़े।

2-सार्क में सुनाई दो टूक

पाक के इस्लामाबाद में सार्क देशों की बैठक हुई। मेजबान होने के नाते पाक खुद को ज्यादा मजबूत समझने की गुस्ताखी कर रहा था। गृहमंत्री राजनाथ सिंह के पहुंचने के साथ ही वहां आतंकियों का विरोध प्रदर्शन सामने आ गया। जिसके बाद पाक को वो झेलना पड़ा जिसकी उम्मीद उसे नहीं थी। राजनाथ सिंह ने पाक के ही मंच से पाकिस्तान को खरी खोटी सुनाई और उसके बाद कार्यक्रम के लंच को ठुकरा कर भारत चल दिए। वैश्विक स्तर पर पाक की इस पर जमकर किरकिरी हुई। आलम ये हो गया कि पाक कि सियासत में भूचाल आ गया। सियासतदानों को बाहर और अंदर दोनों तरह के विरोध का सामना करना पड़ा।

3-पीएम के भाषण से पाकिस्तान में हलचल

अब तक बात कश्मीर पर हो रही थी। कुछ ही महीनों में भारत ने सरहद से लेकर बातचीत की मेज तक पर ऐसा रूख दिखाया कि अब बात कश्मीर की नहीं बल्कि पाक अधिकृत कश्मीर की हो रही है। बदलाव तो इस तरीके से महसूस किया जा सकता है कि बलूचिस्तान के मुद्दे पर पाक के सियासतदान पीएम मोदी को जवाब दे रहे हैं। पासा कब पलटा पाक को इस बात का एहसास भी नहीं हुआ।

4-कश्मीर के मुद्दे पर बैकफुट पर पाकिस्तान

अब कश्मीर बैकफुट पर है। पाकिस्तान बलूचिस्तान के मसले पर वार पलटवार कर रहा है। कश्मीर के मसले पर खुद बात के लिए आमंत्रित कर रहा है। ये सारे संकेत इस ओर इशाारा कर रहे हैं कि पीेएम मोदी एक दूर दृष्टि के साथ पाकिस्तान को ट्रैक कर रहे थे जिसका असर अभी दिखाई दे रहा है।

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