behind lord shiva born 1

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वैसे तो भगवान शिव को तीनो लोको का संहारक कहा जाता है. उन्हें भोले नाथ को जन्म और मृत्यु से परे मन जाता है, लेकिन उनकी उतपत्ति को लेकर पुराणों में अलग अलग तरह की व्याख्या है. शिवपुराण के मुताबिक भगवान शिव की उत्पत्ति को लेकर कहा जाता है की वो स्वयं भू हैं, सृष्टि में उनका जन्म खुद से ही हुआ है. लेकिन ऐसे भी कुछ कथाएं हैं जिनमे भगवान शिव के जन्म को लेकर कुछ कहा और सुना गया है.

विष्णु पुराण में शिव के जन्म के बारे में एक कथा प्रचलित है. उसके अनुसार भगवान ब्रह्म को एक बच्चे की जरुरत थी. उसके लिए वो तपस्या करने लगे तो उनकी गोद में एक बच्चा आ गया जो रो रहा था. ब्रह्मा ने बच्चे से पूछा कि तुम क्यों रो रहे हो, तो बच्चे ने कहा की मेरा नाम ब्रह्मा नहीं है. तब ब्रह्मा ने बच्चे का नाम रूद्र रख दिया.

भगवन शंकर के ब्रह्मा पुत्र के रूप में जन्म लेने के पीछे भी विष्णुपुराण में एक और पौराणिक कथा है। जिसके अनुसार जब धरती, आकाश, पाताल समेत पूरा ब्रह्माण्ड जलमग्न हो गया था तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश के सिवा कोई भी देव या प्राणी यहां नहीं था। तब केवल विष्णु भगवन ही जल सतह पर अपने शेषनाग पर लेटे नजर आ रहे थे। उसी वक़्त भगवन विष्णु की नाभि से कमल नाल पर ब्रह्मा जी प्रकट हुए।

SHIV

इसके अलावा ऐसा भी उललेख है कि जब बेम्हा और विष्णु दोनो देव सृष्टि के संबंध में चर्चा कर रहे थे तो शिव भगवान प्रकट हुए। भगवन ब्रह्मा ने उन्हें पहचानने से इनकार कर दिया था। तब शिव के रूठ जाने के डर से भगवान विष्णु ने ब्रह्मा को शिव की याद दिलाई थी । तब ब्रह्मा को अपनी गलती का एहसास हुआ और शिव से माफी मांगते हुए उन्होंने उनसे अपने पुत्र रूप में पैदा होने का आशीर्वाद मांगा। उस वक़्त भगवन शिव ने ब्रह्मा की प्रार्थना स्वीकार करते हुए उन्हें यह आशीर्वाद दिया था.

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