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पुतिन ने दिया पीएम मोदी को बहुत बड़ा धोखा…मोदी लेंगे इस संग्राम का बदला !

putin ne diya pm modi ko bahut bada dhokha

नई दिल्ली(रिपोर्ट अड्डा) : भारत के रूस के साथ काफी पुराने रिश्ते हैं। नेहरू के जमाने से भारत और रूस के संबंध पूरी दुनिया में दोस्ती की मिसाल बने हुए हैं। भारत का पुराना सहयोगी होने के नाते रूस मे हर मौके पर भारत का साथ दिया है। केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद से इस बात की उम्मीद थी कि दोनों देशों के बीच रिश्ते सामान्य से और अच्छे होंगे। कुछ दिन पहले ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत के दौरे पर आए थे। इस दौरान उनकी पीएम मोदी के साथ मुलाकात भी हुई थी। इस मुलाकात के दौरान दोनों देशों के बीच अहम रक्षा डील भी हुई थी।

इस मुलाकात के बाद माना जा रहा था कि रूस और भारत की दोस्ती में चार चांद लग गए हैं। लेकिन ऐसा होता दिख नहीं रहा है। रूसी राष्ट्रपति पुतिन अपने मूडी स्वभाव के लिए मशहूर हैं। उनके लिए रूस सर्वोपरि है। रूस के लिए वो किसी भी देश से हाथ मिलाने के लिए तैयार हो सकते हैं। अपने देश का हित सोचना हर नेता का फर्ज है। लेकिन इसके लिए पुराने संबंधों को ताक पर नहीं रखना चाहिए। भारत और पाकिस्तान के बिगड़ते रिश्तों के बीच दुनिया का शक्ति संतुलन और समीकरण काफी बदला है। सीरिया में रूस के दखल से नाटो एशिया में कमजोर हुआ है।

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अब रूस अपनी ताकत और सामरिक पहुंच को बढ़ाना चाहता है। अफगानिस्तान का दर्द रूस आज तक नहीं भूल पाया है। यही कारण है कि अब फिर से एशिया में अपनी धाक जमाने के लिए रूसी पाकिस्तान का सहारा ले रहा है। इसके लिए वो भारत के साथ अपने संबंधों को भी किनारे कर रहा है। हाल ही में अमृतसर में हुए हार्ट ऑफ एशिया समिट के दौरान रूसी ने पाकिस्तान का पक्ष लिया। एक तरफ जहां अफगानिस्तान और भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को जमकर खरी खोटी सुनाई वहीं रूस ने पाकिस्तान का पक्ष लिया।

रूस ने कहा कि भारत जिस तरह से पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बना रहा है उस से दोनों में किसी देश को फायदा नहीं होगा। रूस का पाकिस्तान को लेकर ये रुख भारत के लिए अच्छी खबर नहीं है। पाकिस्तान के प्रति नरमी दिखाने के लिए रूस के पास ठोस कारण है। खबर है कि रूस पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट का इस्तेमाल कर सकता है। इस पोर्ट के जरिए वो एशिया में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। पीएम मोदी जहां रूस के साथ पुराने संबंधों को अहमियत दे रहे हैं। वहीं रूस ने भारत के साथ धोखा देने का काम किया है। इस से पहले रूसी सेना ने पाकिस्तानी सेना के साध युद्ध अभ्यास भी किया था। अब देखना है कि पीएम मोदी रूस के धोखे का जवाब किस तरह से देते हैं।

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