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इन वजहों से प्रशांत किशोर ने यू पी में कांग्रेस से बनाई दूरी

prashant kishor make distance to congress

नई दिल्ली (रिपोर्ट अड्डा): केंद्र में भाजपा और बिहार में नीतीश को सत्ता में पहुँचाने में अहम भूमिका निभाने वाले प्रशांत किशोर को कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में अपना खोया हुआ सम्मान पाने के लिए अपना खेवनहार बनाया।था। कांग्रेस ने उम्मीद लगाईं थी कि जो जादू केंद्र और बिहार में चला वहीँ जादू प्रशांत किशोर यूपी में भी चलायेंगे। उत्तर प्रदेश चुनाव में कांग्रेस ने जोर-शोर से तैयारी शुरू की थी। प्रशांत ने कांग्रेस को निराश भी नहीं किया। उन्होंने आते ही यूपी में कांग्रेस को चर्चा में ला दिया। चाहे वो राहुल गांधी की किसान सभा हो या खाट सभा या फिर सोनिया गांधी की बनारस रैली।

वहीँ प्रशांत किशोर अब कांग्रेस की रणनीति के पीछे नहीं हैं। प्रशांत किशोर अचानक ही यूपी के चुनावी परिदृश्य से गायब हो गए। लेकिन, वो प्रशांत किशोर आखिर गायब क्यूँ हो गए। उनकी चर्चा नहीं हो रही। आखिर इसके पीछे की वजह क्या हैं?27 सालों से अगर कांग्रेस यूपी में सत्ता से बाहर हैं तो इसकी मुख्य वजह इसके कार्यकर्ताओं और नेताओं की उदासीनता हैं। प्रशांत किशोर ने उनसे भागदौड़ करवाई। ये भागदौड़ कांग्रेसी नेताओं को रास नहीं आई। वो आरामतलबी के शिकार हैं। कांग्रेस नेताओं के काम करने का तरीका अलग तरह का हैं।

उनके लिए गांधी परिवार ही सब कुछ हैं। वो कांग्रेसी नेता जिनकी राजनीति का मकसद ही हाईकमान से नजदीकी बनाना है वो भला बूथ स्तर पर जाकर लोगों से कैसे मिलें? काम हाथ में लेते ही प्रशांत किशोर ने सभी नेताओं को एक निश्चित संख्या में कार्यकर्त्ता बनाने का होमवर्क दिया। वो सुस्त और निष्क्रिय पड़े नेताओं को सक्रिय बनाना चाह रहे थे। जो बात उन नेताओं को बिल्कुल भी पसन्द नहीं आई।

यूपी में चुनाव के तारीखों के एलान से काफी पहले ही प्रशांत ने यूपी में कांग्रेस के लिए माहौल बनाना शुरू कर दिया था। और, कांग्रेस को चर्चा में ला दिया। खाट सभा को लोगों ने गंभीरता से लिया। पहली बार गंभीरता से राजनीति करते नजर आये। वो मुद्दों पर बात करते नजर आये। लेकिन, खाट सभा के दौरान राहुल गांधीं के बयानों के कारण प्रशांत किशोर को निराशा हुई। बची हुई कसर खून की दलाली वाले बयान ने पूरी कर दी। इस के बाद प्रशांत किशोर हाशिए पर आ गए। आलाकमान का भी भरोसा जाता रहा। पार्टी के पुराने मठाधीश टाइप के नेताओं को भी प्रशांत पसन्द नहीं थे। उन्होंने आलाकमान को प्रशांत के खिलाफ भड़काना शुरू कर दिया। यहीं कारण हैं कि अब प्रशांत कांग्रेस की रणनीति के पीछे नजर नहीं आ रहे। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठजोड़ की बात भी प्रशांत किशोर ने ही शुरू की थी। वो मुलायम सिंह से मिले भी थे। हालाँकि कांग्रेस के कुछ नेताओं को यह बात बिल्कुल भी पसन्द नहीं आई।

सपा के साथ गठबंधन को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर ने प्रशांत पर निशाना साधा। जनता से दूरी और मीडिया में चमकना कांग्रेसी नेताओं की परिपाटी हैं। सपा के बाद बसपा से गठजोड़ की बात ने कांग्रेस नेताओं को परेशान कर दिया।
सीएम कैंडिडेट शीला दीक्षित और प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर प्रदेश में सक्रिय नहीं हैं। प्रशांत के द्वारा कांग्रेस को जनता की नजरों में लाने के लिए किये गए हर प्रयास का कांग्रेसी नेताओं ने पुरजोर विरोध किया। प्रशांत किशोर की टीम कोई8 काम करने की वो आजादी कांग्रेस में नहीं मिली जो उन्हें मोदी के साथ मिली। यहीं मुख्य वजह हैं कि प्रशांत और उनकी टीम ने खुद को यूपी के चुनावी परिदृश्य से दरकिनार कर लिया।

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