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EXCLUSIVE: पटना की युवती ने बताया था, उरी में हो सकता है आतंकी हमला

Uri Attack

क्या उरी में आतंकी हमले का अंदेशा 10 दिन पहले ही हो गया था। एेसा खुलासा होता है सोशल मीडिया के माध्यम से। दरअसल खाड़ी देश में रहने वाली पटना की एक युवती को 10 दिन पहले यह अंदेशा हो गया था। इसकी जानकारी भी उसने अपने एक फेसबुक फ्रेंड को दी थी। यूपी के रामपुर में रहने वाले इस दोस्त ने यह जानकारी पुलिस तक पहुंचा दी थी।

पुलिस और जांच एजेंसियां अगर इस जानकारी के आधार पर अलर्ट हो जाती तो कश्मीर पर हमला टाला जा सकता था। ये कहना तो अभी जांच का विषय है लेकिन यूपी के एडीजी (कानून-व्यवस्था) दलजीत चौधरी के अनुसार इस मामले की जांच एटीएस को सौंप दी गई है।

रामपुर के एक आरटीआई कार्यकर्ता से खाड़ी देश की एक युवती फेसबुक के जरिये जुड़ी हुई है। यह युवती मूलरूप से पटना की रहने वाली है। आरटीआई कार्यकर्ता के फेसबुक वॉल पर मोबाइल नंबर भी दर्ज है, जिस पर वह व्हाट्सएप चलाते हैं। सोशल साइट के जरिए यह महिला उनसे व्हाट्सएप से जुड़ी। 5 सितंबर को खाड़ी देश की इस महिला ने आरटीआई कार्यकर्ता को मैसेज भेजे थे। इसमें उसने बताया कि इरफान यूनुस नाम के पाकिस्तानी शख्स के बारे में उसके पास जानकारी है, जिसे शेयर कर रही है। यह शख्स आजाद कश्मीर से है, जो कश्मीर में आतंकवादी घटना को अंजाम देने की फिराक में है। इसके बाद उसने आरटीआई कार्यकर्ता को व्हाट्सएप पर ही उस संदिग्ध का फोटो और अन्य जानकारियां भी शेयर कीं।

आरटीआई कार्यकर्ता ने बताया कि फोटो और अन्य जानकारियों का प्रिंट लेकर उन्होंने एसपी को रजिस्टर्ड डाक से भेजा। इस पर एसपी ने उच्चाधिकारियों को अवगत कराया। आरटीआई कार्यकर्ता के मुताबिक, 8 सितंबर को उन्होंने एसपी को पत्र भेजा और 9 सितंबर की शाम को एलआईयू ने उससे संपर्क किया। 10 सितंबर को आईबी और एसटीएफ लखनऊ की टीम ने भी रामपुर आकर उससे जानकारी ली। उन्होंने उस युवती का नंबर एसटीएफ को दिया और उससे बात भी कराई। इस पूरे मामले में जब रामपुर के पुलिस अधीक्षक संजीव त्यागी से जानकारी मांगी गई तो उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।

रामपुर पुलिस को इस मामले की सूचना मिली थी, जिसकी जांच आईजी एटीएस कर रहे हैं। फिलहाल उरी हमले से इसका कनेक्शन होने की पुष्टि नहीं हुई है।
– दलजीत चौधरी, एडीजी कानून व्यवस्था

‘हिन्दुस्तान’ के पास साक्ष्य उपलब्ध
‘हिन्दुस्तान’ के पास आरटीआई कार्यकर्ता और खाड़ी की इस युवती के बीच हुए बातचीत के सारे प्रमाण मौजूद हैं। चूंकि, यह मामला देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है लिहाजा, हम खबर में आरटीआई कार्यकर्ता और उस युवती का नाम उजागर नहीं कर रहे हैं। न ही वह प्रमाण प्रकाशित कर रहे हैं।

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