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नोटबन्दी पर लालू के रवैये से नीतीश नाराज़, लालू को दे डाली चेतावनी

Notebandi Nitish speak to kumar Lalu

नई दिल्ली (रिपोर्ट अड्डा): जब से नोटबन्दी की घोषणा हुई हैं। बिहार में महागठबंधन की दरार साफ नजर आ रही हैं। नोटबन्दी को लेकर बिहार में महागठबन्धन सरकार में तनातनी चल रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी के प्रखर विरोधियों में से एक बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने न केवल नोटबन्दी के मुद्दे पर केंद्र सरकार का समर्थन किया था बल्कि उन्होंने कहा था कि सरकार को अब बेनामी संपत्ति के खिलाफ भी इसी तरह का कदम उठाना चाहिए। उन्होंने पीएम मोदी की नोटबन्दी को लेकर तारीफ भी की।

वहीं दूसरी ओर खुद पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने नीतीश कुमार को नोटबन्दी पर समर्थन देने के लिए धन्यवाद कहा। और नीतीश कुमार की तारीफ की। बीजेपी और नीतीश कुमार की बढ़ती नजदीकी से लालू यादव परेशान हैं। अगर, महागठबंधन टूटता हैं तो लालू के बेटों का सियासी भविष्य दांव पर लग जायेगा।

इस सब से लालू यादव की परेशानी बढ़ती जा रही हैं। लालू यादव इस प्रयास में है कि किसी भी तरह नीतीश कुमार नोटबन्दी के विरोधी खेमें में आ जाय। लेकिन, फिलहाल ऐसा होता नहीं दिख रहा।

लालू ने सोशल मीडिया का सहारा लेते हुए मोदी पर हमला किया हैं। अपने ट्वीटर एकाउंट पर लालू यादव ने लिखा हैं कि क्या कोई ऐसा प्रधानमंत्री होता हैं जो सरेआम चीनी कंपनी का प्रचार करता हैं। कहता हैं पेटीएम करे, पेटीएम करे। लालू ने लिखा हैं कि पीएम पद की गरिमा होती हैं।

जदयू और राजद के बीच नोटबन्दी को लेकर मतों में भिन्नता हैं। नीतीश कुमार ने जहाँ इस फैसले का समर्थन किया हैं। तो वहीं लालू यादव इसका लगातार विरोध कर रहे हैं। लालू ने कहा कि नीतीश कुमार ने नोटबन्दी का समर्थन भले ही किया हैं लेकिन, वो जनता को हो रही दिक्कतों से दुखी हैं। लालू यादव ने कहा कि नोटबन्दी के खिलाफ जल्द ही आंदोलन शुरू किया जायेगा। जिसमें नीतीश भी साथ में होंगे। लालू ने ये भी कहा कि नीतीश ने कहा हैं कि 50 दिनों के बाद नोटबन्दी का रिव्यू लिया जायेगा। उसके बाद केंद्र सरकार को इसका जवाब देना होगा। लालू ने कहा कि 50 दिन पूरा होने के बाद नीतीश कुमार खुल कर हमारे साथ आ जायेंगे। उनकी बातों में विरोधाभास की झलक मिल रही हैं क्योंकि नीतीश तो पहले ही उनके साथ हैं। बात अगर नोटबन्दी के विरोध की हैं तो इसका विरोध करने के लिए नीतीश को लालू के सहारे की जरुरत नहीं हैं। उनके इस बयान से महागठबंधन को बचाने की कोशिश साफ नजर आती हैं।

देश में नोटबन्दी को लेकर अभी भी राजनीति का बाजार गर्म हैं। संसद का पूरा शीतकालीन सत्र बर्बाद होने के बाद अब भी नेताओं की बयानबाजी जारी हैं। हर कोई नोटबन्दी को लेकर अपना स्वार्थ साधने में लगा हैं। लालू यादव भी प्रदेश की राजनीति में अपने बेटों का भविष्य संवारने और महागठबंधन को बचाने की कवायद में लगे हैं।

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