process of the period to come

नई दिल्ली(रिपोर्ट अड्डा):- कहते हैं कि लड़कियां लड़को की अपेक्षा जल्दी बड़ी होती है। उनका बड़ा होना आस-पड़ोस, रिश्तेदारों, पैरेंट्स को जल्दी दिखना शुरू हो जाता है। यह कोई स्वाभाविक प्रक्रिया नहीं है। बदलती जीवनशैली का असर बच्चों की सामान्य शारीरिक प्रक्रिया पर पड़ रहा है।

8 साल की उम्र में बच्चियों को पीरियड शुरू होना। यह विकास की सहज प्रक्रिया ना होकर चिकित्सीय समस्या भी हो सकती है।
समय से पहले लड़कियों में शारीरिक विकास के लक्षण का नजर आना अर्ली प्यूबर्टी या यौवनकाल का जल्दी आरम्भ कहा जाता है।लड़कियों में आमतौर पर यौवनकाल के लक्षण 13-14 साल की उम्र के आस-पास होता है, जैसे:- पीरियड का आना, स्तनों का आकार बढ़ना। 13-14 साल की उम्र यौवन काल का सही समय है। लेकिन, बदलती जीवनशैली के कारण खासकर शहरी लड़कियों में पीरियड शुरू होने की उम्र घटकर 10 वर्ष से भी कम हो गई है।

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10 वर्ष से भी कम आयु में लड़कियों में पीरियड का आना उन्हें मानसिक रूप से परेशान कर देता है।अपने शरीर के प्रति हमेशा तनाव में रहती है। हमउम्र के साथ वो खेलना बंद कर देती है। उनका आत्मविश्वास खोने लगता है। जल्दी पीरियड शुरू होने से लड़कियों में समयपूर्व सेक्स संबंधी इच्छाये जागृत हो जाती है। जो असहज स्थिति है। लड़कियां मूड स्विंग की शिकार हो जाती है। चिड़चिड़ेपन और अवसाद के लक्षण दिखाई पड़ता है।

? इसका कारण:-

सीनियर गाइनेकोलॉजिस्ट डॉ वरुणा वेणुगोपाल राव समय से पहले पीरियड शुरू होने के लिए निम्न कारणों को जिम्मेदार बताती है:-

* अवांछनीय मोटापा।

* बचपन से निष्क्रिय जीवनशैली।

* असंतुलित खानपान।

* खमीरयुक्त भोजन का अत्यधिक सेवन।

* ज्यादा फ्लोराइड वाले पानी का इस्तेमाल।

* प्लास्टिक से बनी वस्तुओं का अत्यधिक प्रयोग।

* Pregnancy में माँ का सोयाबीन युक्त खाद्य पदार्थों का अत्यधिक सेवन।

* तनावपूर्ण बचपन।

* अप्राकृतिक हार्मोन्स , एंटीबायोटिक्स और पेस्टिसाइड्स से पकाई गई सब्जियां, फल, मीट, अंडे आदि का ज्यादा सेवन।

परेशानी से बचने के उपाय:-

* हमेशा शुद्ध और ताजा भोजन करे।

* खाने के सामान को प्लास्टिक के डब्बे या पॉलीथिन में स्टोर ना करे।

* ऐसे डेयरी प्रोडक्ट्स से बचे जो प्राकृतिक ना हो।

* पेस्टीसाइड्स और केमिकल्स खाद्य पदार्थों से बचे।

* प्रोसेस्ड और पैक्ड भोजन से बचे।

* खमीरयुक्त भोजन से बचे।

* सोयाबीन युक्त खाद्य पदार्थो से परहेज करे।

* स्तनपान आवश्य कराये।

* लड़कियों को ख़राब प्लास्टिक के खिलौने ना दे। इनमें हानिकारक बीपीए तत्व होते है।

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