उलेमा ने जारी किया फतवा, कहा लड़कियों को ये काम करना हराम है

girls playing football in skirt

girls playing football in skirtफतवों की नगरी के रूप में मशहूर हो रहे देवबंद से एक और फतवा निकल कर आया है, सारे फतवों में एक बात कॉमन होती है कि ये अक्सर मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ ही होते हैं, जैसे कुरान में केवल महिलाओं के बारे में ही लिखा गया है, फतवे भी ऐसे ऐसे जिनका कुरान में कोई जिक्र ही नहीं, वैसे हो सकता है कि इस लेख से कुछ लोगों की भावनाएं आहत हो जाएं, उसके लिए पहले से माफी। लेकिन ये बात भी अपनी जगह सही है कि फतवों का असली मतलब शायद ये मुस्लिम संगठन भूल गए है। …देवबंद से अजीब अजीब फतवे निकलते रहते हैं। कभी कपड़ों को लेकर, तो कभी बैंक में नौकरी करने वाले से निकाह नहीं करने को लेकर,

अब एक अजीब फतवा आया है, इस में कहा गया है कि लड़कियां स्कर्ट पहन कर फुटबॉल नहीं खेल सकती हैं, ये इस्लाम में हराम माना गया है। इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद से मुस्लिम युवतियों के स्कर्ट पहनकर फूटबाल खेलने पर फतवा जारी हुआ है. इस फतवे के मुताबिक औरतों और मर्दों के लिए जिस्म ढकने का फर्ज है. जिसको सतर कहते हैं. अगर उसकी नुमाइश की गई तो ये हराम है लिहाज़ा मुफ़्ती ने युवतियों के मिनी स्कर्ट पहनने को हराम बता दिया.

देवबंद के उलेमा ने लड़कियों के स्कर्ट पहन कर स्टेडियम में फूटबाल खलने और देखने को इस्लाम में हराम करार दिया है. उनका कहना है कि ये शरीयत के खिलाफ है खास बात ये है कि अब फतवे भी ऑनलाइन जारी होने लगे हैं, इसके लिए बाकायदा एक विभाग है, जिसके चेयरमैन मुफ़्ती अरशद फारुकी ने कहा है कि इस्लाम में महिलाओं के लिए जो हिदायतं हैं उनको मानना चाहिए। जवान लड़कियां और बच्चियां ऐसे खेल ना खेलें जो इस्लाम में हराम हैं। मुफ्ती साहब मर्दों के बारे में शायद ये बात नहीं बता पाए।

इनका कहना है कि फुटबॉल या फिर कोई भी खेल जिस में शरीर का अंग दिख रहा हो वो खेलना नहीं चाहिए। मुफ्ती साहब ने लड़कियों के फुटबॉल खेलने के लिए एक गुंजाइश भी निकाल ली है, इनका कहना है कि अगर केवल लड़कियां आपस में खेल रही हैं तो ये हो सकता है। लेकिन बड़ी लड़कियों का स्कर्ट या फिर टाइट कपड़े पहन कर फुटबॉल खेलना ठीक नहीं है। अब मुफ्ती साहब को ये बता देते हैं कि कट्टर इस्लामिक देश सउदी अरब ने अपने यहां स्टेडियम में महिलाओं को फुटबॉल देखने की इजाजत हाल ही में दी है। यहां मुफ्ती साहब फुटबॉल छोड़कर लड़कियों के जिस्म के पीछे पड़े हैं।

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