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बीजेपी में वापसी के लिए बेकरार हैं नवजोत सिंह सिद्धू !

Amarinder's nose harvested by Sidhu as minister

नई दिल्ली (रिपोर्ट अड्डा): नवजोत सिंह सिद्धू भारतीय क्रिकेट, राजनीति और TV जगत का जाना पहचाना नाम। भारत के पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी जो प्रथम बार अमृतसर लोकसभा सीट से BJP के सांसद निर्वाचित हुए। क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद उन्होंने दूरदर्शन पर क्रिकेट की कमेंट्री शुरू की। उसके बाद राजनीति में सक्रिय हो गए। राजनीति और कमेंट्री के अलावा उन्होंने छोटे पर्दे पर भी अपनी पहचान बनाई। कॉमेडी शो में बतौर जज और बिग बॉस प्रतिभागी के रूप में।

सिद्धू और विवाद का चोली दामन का सम्बन्ध है। 2004 में उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया। उससे पहले 1998 में किसी गुरुनामसिंह नामक व्यक्ति की इरादतन हत्या के सिलसिले में इन्हें सहआरोपी बनाया गया था। उनपर गुरुनाम सिंह की हत्या में मुख्य आरोपी भूपिंदर सिंह की सहायता करने का आरोप था

2004 में सांसद बनते ही उनकी पुरानी फाइल खोल दी गई। दिसम्बर 2006 में उनपर अदालत में मुकदमा चला। उपलब्ध गवाहों के आधार पर गैरइरादतन हत्या के आरोप में उन्हें 3 साल की सजा हो गई। उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की। निचली अदालत द्वारा मुकर्रर सजा पर उच्चत्तम न्यायालय ने रोक लगा दी।

फरवरी 2007 के उप चुनाव में उन्होने दोबारा अमृतसर की सीट हासिल कर ली। उसके बाद के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने इस सीट पर अपनी पकड़ कायम रखी।

सिद्धू का राजनीतिक विवाद 2014 में शुरू हुआ। BJP से उनका अलगाव हो गया। 2014 में जब पार्टी ने उन्हें अमृतसर की जगह कुरुक्षेत्र या पश्चिमी दिल्ली या कहीं और से चुनाव लड़ने की पेशकश की। उन्होंने ठान लिया अमृतसर नहीं तो कहीं नहीं। इसके अलावा सिद्धू चाहते थे की पंजाब में BJP अकेले चुनाव लड़े। अकालियों का साथ BJP ने नहीं छोड़ा। इन दोनो कारणों ने उन्हें BJP से विमुख कर दिया। उन्होंने BJP का साथ छोड़ कांग्रेस का हाथ थाम लिया।

इन दिनों सिद्धू की ताजा चर्चा राजनीतिक नहीं है। इन दिनों वे अपनि कॉमेडी शो के कारण चर्चा में है। जब वे BJP से जुड़े थे तो पार्टी को उनकी कॉमेडी शो से कोई आपत्ति नहीं थी। लेकिन, कांग्रेस का दामन थामने के बाद ये कॉमेडी शो उनके गले का फंदा बन गया है। विरोधियों ने इस मुद्दें पर सिद्धू के साथ-साथ पंजाब सरकार को भी निशाने पर ले लिया है।

पंजाब में कोई भी सरकारी कर्मचारी 1966 के नियम 15 के तहत प्राइवेट ट्रेड या बिजनेस नहीं कर सकता। हाईकोर्ट ने इसे Conflict of interest का मामला बताया है। सिद्धू कैबिनेट मंत्री है। संवैधानिक पद पर होते हुए उन्हें कॉमेडी शो में भाग नहीं लेना चाहिए।

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इसके अलावा कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ भी उनके मनमुटाव की खबरें आती रहती है। कैप्टन ने उनके कॉमेडी शो करने पर एतराज जताया था। उसके बाद ही इस मामलें ने तूल पकड़ा। सिद्धू को लगता है अगर कैप्टन ने कानूनी राय की बात नहीं की होती तो यह बखेड़ा ही खड़ा नहीं होता। जो आजादी उन्हें BJP में हासिल थी वो यहां नहीं है। एक तो कम महत्वपूर्ण मंत्रालय मिला ऊपर से कॉमेडी शो करने पर रोक टोक।

एक गलत कदम और राजनीतिक जीवन दांव पर। सिद्धू क्या इस बार चुक गए? BJP को छोड़ कर कांग्रेस को अपनाना कहीं सिद्धू के लिए घाटे का सौदा ना साबित हो

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