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मोदी के इस कदम से किसानों की जिंदगी पर क्या असर पड़ रहा है, पढ़िए इस रिपोर्ट में

Modi's move is affecting the lives of farmers

नई दिल्ली (रिपोर्ट अड्डा):  नोटबन्दी का काफी असर हो रहा हैं।लोग बैंक में पैसे जमा कर रहे। इससे नकदी बढ़ेगी, कर्ज सस्ता होगा, मंहगाई दर में कमी आएगी।
नोटबन्दी का व्यापक असर इस वक्त बैंकों और ATM के सामने लगी लंबी लाइन के तहत देखा और प्रचारित किया जा रहा। इस फैसले का आने वाले दिनों में बहुत व्यापक असर देखने को मिलेगा

आने वाले दिनों में अंतर्राष्ट्रीय बाजार पर भी इसका असर देखने को मिलेगा। भारतीय मुद्रा का विदेशों में असर बढ़ जायेगा। इसको लेकर तमाम तरह के सवाल उठ रहे। इसका नकारात्मक और सकारात्मक असर आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा।

इसका असर गांवों पर काफी गहरा पड़ा हैं। दिहाड़ी मजदूरों की दिनचर्या पूरी तरह से चरमरा गई हैं। उन्हें अपना काम-धंधा छोड़ सारा दिन लाईन में खड़ा होना पड़ता हैं। उनकी दैनिक आय पर ही निर्भर करता हैं। आज कल हम इससेे संबंधित अनेक खबरें सुनने को मिलती है। जैसे- कहीं ग्रामीणों ने बैंक पर ताला जड़ दिया। तो कहीं ग्रामीणों ने बैंक पर जम कर बवाल काटा।

वैशाली प्रखण्ड के चक्रमदास गाँव स्थित उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक द्वारा पिछले 4 दिनों से पैसा नहीं देने पर ग्रामीणों ने बैंक पर जम कर बवाल काटा। मौके पर उपस्थित ग्रामीणों में से अमरनाथ कुमार, जगदीश महतो, मुकेश यादव, रामनारायण सिंह, दिनकर पासवान सहित कई लोगों का आरोप था कि नोटबन्दी के मात्र 1 दिन बाद 500rs प्रति व्यक्ति की दर से भुगतान किया गया। उसके बाद आज कैश नहीं हैं। कल राशि दी जायेगी कह कर हमलोगों को परेशान कर रहे। जबकि अभी खेती गृहस्थी का समय हैं। खाद बीज खरीदनी हैं। खेत की जुताई के पैसे मजदूरों को देने हैं। लेकिन, रोज बैंक से उन्हें कैश की कमी का रोना रो कर टाल दिया जाता हैं।

सरकरी घोषणा के अनुरूप काम नहीं हो पा रहा। समस्तीपुर जिले में नोतबन्दी की घोषणा के बाद समस्या बढ़ती जा रही। खासकर महिलाओं और वृद्धों को भीड़ की वजह से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा हैं। सरकारी निर्देशों के बाद भी किसी नही बैंक में senior citizen के लिये अलग से व्यवस्था नहीं की गई हैं। देश के कई हिस्सों से कभी किसी के मरने की तो कहीं लाईन में खड़े खड़े बेहोश होने की घटना सामने आई हैं।

बैंकों में बार-बार लिंक फेल होने से ग्राहकों को तकलीफ हो रहीं। सरकार ने घोषणा की किसानों को हो रही दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए गांवों में कैश वैन भेजा जायेगा। लेकिन, अभी तक ऐसा हो नहीं पाया। नोट नहीं बदल पाने के कारण कृषि कार्य भी बाधित हैं। पुराने नोट मजदूर भी नहीं ले रहे जिससे परेशानी हो रहीं। धान काटने और झाड़ने के लिये मजदूर की जरूरत होती हैं। लेकिन, खुदरा पैसे के अभाव में मजदूर भी काम करने से इन्कार कर रहे। जिससे खेतो में खुद काम करना पड़ रहा। खुद फसल काट रहे जिससे काफी परेशानी हो रहीं। नोटबन्दी का किसानों पर बुरा असर पड़ा हैं। लेकिन, सरकार की ओर से किसानों के लिये अलग व्यवस्था नहीं की गई हैं।

नोटबन्दी का किसानों और खेती पर बुरा प्रभाव पड़ सकता हैं। खरीफ सीजन के फसल की बिक्री और रबी फसल की बुवाई प्रभावित हो रही। अगर नगदी संकट जल्दी हल नहीं हुई तो किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ग्रामीण इलाकों में नोटों की कम आपूर्ति कृषि गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं।
बैंको में नोटों की भारी कमी। और नोटो को बदलने की भारी भीड़। नोटों की कमी होने से किसानों में बेसब्री जरूर हैं। लेकिन, कोई भी सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा नहीं कर रहा हैं।

एक किसान राज कुमार सिंह के अनुसार शादी और अन्य खर्च में मुश्किलें पैदा हो रही हैं। खाद, बीज, किटनाशकों की आपूर्ति को-ऑपरेटिव सोसाइटी से हो रही। या फिर जान-पहचान के दुकानदार से उधार लेकर काम चला रहें। धान की खरीद करने वाले व्यापारी मनमाना कर रहे। नकदी के अभाव में भुगतान के लिये 2-3 सप्ताह का समय ले रहे। सब्जी मंडी में किसानो को उचित मूल्य मिल नहीं मिल रहा। बिक्री के बाद भुगतान का संकट। पैसों के अभाव में अगली फसल प्रभावित हो सकती हैं। इस समय नगदी की सख्त जरूरत हैं। डीजल, खाद, दवा और मजदूरों का भुगतान कर सके। बैंको में भीड़ उमड़ी हैं। बाजारों में सन्नाटा हैं। लेकिन, सरकार के निर्णय को लेकर लोगों में आक्रोश नहीं हैं। लोगों को भरोसा हैं की आने वाले एक दो सप्ताहों में स्थितियाँ सामान्य हो जायेगी।

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