राष्ट्रीय

क्या मोदी, गांधी की विरासत को हड़पना चाहते हैं ?

Modi would usurp the legacy of Gandhi

नई दिल्ली (रिपोर्ट अड्डा): खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) के 2017 के कैलेण्डर में कुछ ऐसा देखने को मिला जिसने कई लोगों को चौंका दिया है। KVIC डायरी के नए साल के कैलेण्डर से बापू की जगह प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर लगी है। खादी ग्रामोद्योग के कैलेण्डर और डायरी से महात्मा गांधी आउट हो गए है।

उनकी जगह पीएम मोदी ने ले ली है। साल 2017 के कैलेण्डर और डायरी के कवर पर प्रधानमंत्री मोदी चरखा चलाते दिखाई दे रहे है। खादी ग्रामोद्योग के इस फैसले से ठण्ड में सियासी पारा चढ़ गया है। शिवसेना इसके विरोध में उतर गई है।खादी विलेज Industries कमीशन के सालाना कैलेण्डर में चरखा वही होगा लेकिन, महात्मा गांधी की जगह पीएम मोदी नजर आएंगे। दोनों तस्वीरों में फर्क है। लोगों के दिलोदिमाग में बसी खादी बुनते गांधी जी की ऐतिहासिक तस्वीर का चरखा सामान्य दिखता है। इसी के पास बैठकर गांधीजी अपने अधखुले शरीर के साथ चरखा चलाते हुए देखे जाते है। मोदी का चरखा, गांधी जी के चरखे के मुकाबले में थोड़ा आधुनिक है। खुद मोदी अपने लकदक कुर्ता-पायजामा और सदरी में नजर आ रहे है। बताया जा रहा है कि KVIC में ऐसा कोई नियम नहीं है कि कैलेण्डर और डायरी पर महात्मा गाँधी की तस्वीर ही लगाई जाएगी। सूत्रों के मुताबिक नरेंद्र मोदी की KVIC के कैलेण्डर पर लगी तस्वीर गरीब महिलाओं को चरखा वितरण कार्यक्रम की है और बापू की तस्वीर की जगह मोदी की तस्वीर छपी है ऐसा कहना सरासर तर्कसंगत नहीं है।

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इससे पहले भी 1996, 2002, 2005, 2011, 2012, 2013 और 2016 के कैलेण्डर डायरी पर गांधी जी की तस्वीर नहीं थी। सूत्रों का कहना है कि जो लोग इस विवाद को तूल दे रहे है, उनको समझना चाहिए कि कांग्रेस के 50 सालों के राज में खादी की बिक्री 2% से 7% तक सीमित रही थी लेकिन, पिछले 2 साल में खादी की बिक्री में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। यह बिक्री बढ़ कर 34% हो गई है। यह वृद्धि मोदी द्वारा खादी को जन स्वीकृति दिलवाने की वजह से है।

इस फैसले की वजह से जहाँ आयोग के कर्मचारी नाराज है, वही सोशल मीडिया पर भी खादी ग्रामोद्योग और पीएम मोदी की आलोचना की जा रही है। दिल्ली की मुख्यमंत्री केजरीवाल ने प्रतिक्रिया में कहा कि गाँधी बनने के लिए जन्मों की तपस्या करनी पड़ती है।
मोदी पर आरोप लगाया जा रहा है कि वो बापू की विरासत को हड़पने की कोशिश में है। महात्मा गांधी के पोते तुषार गांधी ने मोदी पर आरोप लगाया है की वो बापू की जगह मोदी खुद खादी के ब्रांड एम्बेसडर बन गए है।

KVIC के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना से इस बारे में जब पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह कोई असामान्य घटना नहीं गई। अतीत में ऐसे बदलाव हो चुके है। विनय सक्सेना पूरा ग्रामोद्योग गांधी जी के दर्शन, विचार और आदर्श पर आधारित हैं। वह KVIC की आत्मा है। उनकी अनदेखी का तो सवाल ही नहीं उठता। लेकिन, मोदी ने खादी को आमलोगों ही नहीं, विदेशी हस्तियों के बीच भी के लोकप्रिय किया है। उन्होंने खादी को पहनने की अपनी अलग स्टाइल विकसित की गई।

सक्सेना ने कहा सच यह है कि मोदी खादी के सबसे बड़े ब्रांड एम्बेसडर है। उनकी सोच KVIC की सोच से मिलती है। यह सोच ” Make in india” के जरिये ग्रामीण आबादी को रोजगार मुहैया कराने, खादी बुनने के लिए आधुनिक प्रौधोगिकी का इस्तेमाल करने, नई खोज करने और इसे बेचने की है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री युवाओं की प्रेरणा भी है।

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