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मोदी जी एक सर्जिकल स्ट्राइक देश के इन दुश्मनों पर भी जरूरी है

Narendra Modi

नई दिल्ली (रिपोर्ट अड्डा) : पीएम मोदी इन दिनों सुपर एक्शन में दिखाई दे रहे हैं। देश की दो सबसे बड़ी समस्याओं पर एक साथ हमला कर रहे हैं। पाकिस्तान के खिलाफ तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीति से काम कर रहे हैं। देश के अंदर भी काले धन की समस्या से निपटने के लिए जो ब्रह्मास्त्र चला है उस से देश के अंदर के दुश्मन बाहर आने लगे हैं। 500 और 1000 के नोट बैन करने के फैसले से काला धन रखने वालों पर शामत आ गई है। काले धन के बोरे बाहर आ रहे हैं। सरकार के इस फैसले से आम जनता को परेशानी तो हो रही है लेकिन वो शांति का परिचय देते हुए सरकार का साथ दे रही है।

पीएम मोदी के फैसले से कुछ राजनेताओं को जरूर मिर्ची लग रही है। इनमें सबसे ज्यादा परेशान होने वाले तीन नेता हैं। पहले नंबर पर हैं राहुल गांधी, दूसरे नंबर पर हैं मायावती, तीसरे नंबर पर हैं अरविंद केजरीवाल। इन नेताओं की सियासत का आधार मोदी विरोध है। ये आज तक स्वीकार नहीं कर पाए हैं कि नरेंद्र मोदी जो चाय बेचते थे वो प्रधानमंत्री बन गए हैं। मोदी सरकार के हर फैसले का विरोध करना इनकी आदत है। राहुल गांधई कहते हैं कि मोदी को आम जनता की फिक्र नहीं है। नोट बैन करने से जनता परेशान हो रही है।

राहुल गांधी शायद अपनी परेशानी बता रहे थे। अगर वो सरकार के इस फैसले से परेशान हैं तो क्या ये माना जाए कि उनके पास काला धन है। वहीं मायावती कहती हैं कि मोदी के इस फैसले से देश में आर्थिक आपातकाल लग गया है। मायावती को शायद ही अर्थशास्त्र के बारे में कुछ पता हो। अगर आर्थिक आपातकाल की बात कर रही हैं तो क्या वो ये बताएंगी कि पूरी लखनऊ में हाथियों, अंबेडकर और अपनी मूर्तियां क्या उन्होने अपने जेबखर्च से बनाई थी। काले धन के इस्तेमाल से अपना महिमामंडन करने वाली मायावती मोदी सरकार पर हमला कर रही है। वाह से उल्टी गंगा।

अब बात करते हैं सरजी केजरीवाल की। जिस दिन मोदी सरकार ने नोट बैन करने का फैसला किया उसके अगले दिन से केजरीवाल को सांप सूंघ गया था। वो सरकार के इस फैसले पर एक ट्वीट तक नहीं कर पाए। शायद सोच रहे होंगे कि अब क्या किया जाए। लेकिन अगले दिन वो पीएम मोदी को लेकर एक विज्ञापन के जरिए हमलावर हो उठे। पेटीएम ने पीएम मोदी को धन्यवाद किया था इस फैसले को लेकर। अब फोटो पीएम मोदी की लगा दी तो इसका मतलब ये नहीं है कि मोदी उनके ब्रांड एंबैसडर बन गए। लेकिन केजरीवाल को ये पसंद नहीं आया।

वो कहने लगे कि दाल में कुछ काला है। सबसे ज्यादा फायदा पेटीएम को हुआ। इसका जवाब केजरीवाल को पेटीएम के सीईओ ने खुद दिया। जाहिर है कि इन मौकापरस्त नेताओं के रहते हुए केंद्र सरकार की हर योजना का विरोध होता रहेगा। मोदी जी से गुजारिश है कि एक सर्जिकल स्ट्राइक इन जैसे मौकापरस्त नेताओं पर भी होनी चाहिए।

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