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तीन तलाक के बाद अब ये है मोदी सरकार का प्लान, यूनिफॉर्म सिविल कोड !

तीन तलाक यूनिफॉर्म सिविल कोड

नई दिल्ली(रिपोर्ट अड्डा): तीन तलाक पर आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना ही दिया। कोर्ट की संवैधानिक बेंच के 5 में से 3 जजों ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार देते हुए इसे तत्काल प्रभाव से खत्म कर दिया। इसी के साथ केंद्र की मोदी सरकार से कहा है कि वो 6 महीने के अंदर इस पर कानून बनाए। तीन तलाक को लेकर मोदी सरकार का रुख शुरू से साफ रहा है। सरकार का कहना है कि वो तीन तलाक के पक्ष में नहीं है। इस स्टैंड के कारण मुस्लिम महिलाएं बीजेपी की तरफ झुकी हैं. इस से सियासी दलों में बेचैनी शुरू हो गई है। जो कल तक तीन तलाक पर कुछ भी बोलने से डर रहे थे।

तीन तलाक पर बीजेपी की जीत
वही नेता अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सराहना कर रहे हैं। यहां तक कि मायावती भी बोल रही हैं कि कोर्ट का फैसला सही है। हालांकि हमेशा की तरह कुछ मुस्लिम संगठन अभी भी शरीयत को कानून से ऊपर मान रहे हैं। उनका कहना है कि शरीयत में दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी को देखते हुए अब मोदी सरकार ने अगहले कदम की तैयारी शुरू कर दी है। तीन तलाक के बाद अब एक बार फिर से यूनिफॉर्म सिविल कोड का मुद्दा गरमा रहा है। पूरे देश में एक नागरिक संहिता लागू करने की मांग तो काफी पहले से होती रही है। लेकिन तीन तलाक पर ऐतिहासिक फैसले के बाद अब फिर से यूनिफॉर्म सिविल कोड पर चर्चा शुरू हो गई है।

क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड ?
यूनिफॉर्म सिविल कोड के जरिए सभी धर्मो, संप्रदाय और पूरे देश के लिए सामान नागरिक संहिता बनाई जाएगी. अब आपको बताते हैं कि यूनिफॉर्म सिविल कोड है क्या और क्यों मुस्लिम संगठन इसके खिलाफ हैं। यूनिफॉर्म सिविल कोड का मतलब देश के हर नागरिक के लिए एक समान कानून। शादी, तलाक और जमीन जायदाद के बंटवारे में सभी मजहबों के लिए एक ही कानून लागू होगा। अभी देश में हर धर्म के लोग इन मामलों का निपटारा अपने पर्सनल लॉ के मुताबिक करते हैं। अगर यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू हो जाए तो सभी धर्मों के लिए एक जैसा कानून होगा। यूनिफॉर्म सिविल कोड के बाद शादी, तलाक, गोद लेना और जायदाद के बंटवारे में सबके लिए एक जैसा कानून होगा, फिर चाहे वो किसी भी धर्म का क्यों ना हो।

मोदी को बढ़त से बौखलाया विपक्ष
अगर ऐसा हो जाएगा तो मजहब के नाम पर अपनी दुकान चलाने वाले लोग बेरोजगार हो जाएंगे। सबसे ज्यादा मुस्लिम संगठन ही यूनिफॉर्म सिविल कोड का विरोध कर रहे हैं. जिस तरह से वो तीन तलाक का विरोध कर रहे थे उसी तरह से समान नागरिक संहिता का भी विरोध शुरू हो गया है। तीन तलाक पर मोदी सरकार के रुख के कारण बीजेपी को फायदा हुआ, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का श्रेय मोदी सरकार को जाएगा। इसी तरह से अगर यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू हो जाता है तो उसका भी श्रेय मोदी सरकार को जाएगा। देश की जनता तो चाहती है कि सभी के लिए एक कानून लागू हो, लेकिन सियासी दल इसके खिलाफ हैं। लेकिन जिस तरहसे माहौल बन रहा है उस से साफ है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड ज्यादा दूर नहीं है।

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