मोदी का चक्रव्यूह: बाबरी पर फैसला बीजेपी को नुकसान नहीं बल्कि फायदा पहुंचाएगा, पढ़िए कैसे

decision on Babri

नई दिल्ली(रिपोर्ट अड्डा): 6 दिसम्बर 1992 को जब बाबरी मस्जिद गिरी तो BJP की चार राज्य सरकारें बर्खास्त की गई। अदालत ने तब तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को प्रतीकात्मक कैद की सजा सुनाई थी। BJP, VHP के बड़े नेताओं पर मुकदमा शुरू हुआ और जल्द ही बन्द भी कर दिया गया। यह बात एक बड़े तबके को हमेशा सताती रही।

बाबरी मस्जिद गिराये जाने के मामलें मे 19 अप्रैल2017 को सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने हलचल मचा दी। कोर्ट ने CBI की अर्जी पर फैसला सुनाते हुए आडवाणी, जोशी, उमा भारती, कल्याण सिंह, विनय कटियार सहित 13 नेताओं पर 120बी के तहत केस चलाने की हरी झंडी दी है। इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपराधिक साजिश के आरोप रद्द कर दिए थे।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने राजनैतिक हलचल तेज कर दी है। सत्ता के गलियारों में इस मामले पर फिर बहस तेज कर दी है। BJP इस राजनीतिक हलचल का पूरा राजनीतिक इस्तेमाल कर फायदा उठाने की फिराक में है।

प्रथम दृष्टया यह BJP के लिए झटका लग रहा क्योंकि इसी मुद्दें ने उसे केंद्र की सत्ता दिलवाई।पार्टी के शीर्ष नेताओं पर मुकदमा चलना पार्टी को नुकसान पहुँचा सकता है। लेकिन, ऐसा है नहीं। गौरतलब है कि राष्ट्रपति पद के लिए जिन नामों की चर्चा है उनमें आडवाणी और जोशी भी शामिल है। कोर्ट के फैसले के बाद अब वे इस रेस में नहीं होंगे। आडवाणी और मोदी के बिगड़े सम्बन्ध और ऊपर से कोर्ट का फैसला आडवाणी के लिए नुकसानदायक है। मोदी भी गुरु दक्षिणा देने की बाध्यता से बच गए।

कोर्ट का फैसला BJP के लिए नुकसानदायक ना होकर फायदे का सौदा है-

1) एक बार फिर से बाबरी मस्जिद विध्वंस मामला अचानक से चर्चा में आ गया। कोर्ट ने फैसले ने इसे फिर से राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बना दिया। 6 Dec 1992 के बाद की पीढ़ी इस मुद्दे से खुद को कनेक्ट कर पाएगी। जो भाजपा के हिंदुत्ववादी एजेंडे को बल देगा।

2) हाईकोर्ट के आदेशानुसार 2 साल तक रोजाना इस मामले की सुनवाई होगी। जब तक मुकदमा चलेगा जज का तबादला नही होगा। कोर्ट ने CBI को आदेश दिया है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि गवाहों को कोर्ट में रोज पेश किया जाय ताकि बाबरी विध्वंस मामले के ट्रायल में कोई देरी ना हो एवं फैसला निर्धारित समय में हो जाये यानि 2 साल में। आगामी लोकसभा चुनाव 2019 में होने को है। मुकदमें की अवधि तक यह हर दिन अखबार की सुर्खियों में शामिल होगा। जो BJP के लिए फायदे की बात है।

3) कोर्ट के आदेश से जनमानस में संदेश जायेगा कि BJP के लिए राम मंदिर मुद्दा केवल चुनावी जुमला नही है बल्कि BJP के शीर्ष नेता राम मंदिर के लिए आपराधिक मामलें को झेल रहे है। यह संदेश BJP के हिन्दू वोटरों का ध्यान अवश्य आकर्षित करेगा।