balasaheb

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सफलता के लिए कोई शॉर्ट कट नहीं है सिर्फ मेहनत करके ही सफलता का स्वाद चखा जा सकता है. ऐसी ही प्रेरणादायी स्टोरी एक ऐसे दिव्यांग किसान की है, जो कभी दूसरों के खेतो में मजदूरी किया करता था. और आज खुद मूंग की खेती कर चार साल में लखपति बन गया. आज ये दिव्यांग ऐसे हज़ारो किसानों के लिए प्रेरणास्त्रोत है जो हालातों से तंग आकर आत्महत्या का रास्ता अख्तियार कर लेते हैं.

महाराष्ट्र के सोलापुर के अंतर्गत आने वाले माढ़ा तहसील के उप्लाई गाँव में दिव्यांग किसान बालासाहब पाटिल (30 साल) ने मुनगा की खेती की और सिर्फ चार साल में अपनी सालाना कमाई 15 लाख कर ली. आज उनकी सफलता को देखकर देश भर के किसान उनसे मुलाक़ात करने के लिए उनके खेत में पहुँच रहे हैं. सबसे कमाल की बात है ये उनकी राय मानकर महाराष्ट्र के सूखा पीड़ित मराठवाड़ा में हजारो किसान कर्ज मुक्त हो चुके हैं.

प्रेरणादायी है कहानी

बालासाहब अपने भाई के साथ कभी दूसरों के खेतों में मजदूरी किया करते थे. घर की हालात इतनी ख़राब थी की दो वक़्त की रोटी भी मयस्सर नहीं होती थी. यहाँ तक की आस पास की दुकानों ने भी उधार देने से इंकार कर दिया था. लेकिन एक सलाह को मानना उनकी किस्मत का सबसे सही फैसला साबित हुआ.

गांव के सहयोगी गणेश कुलकर्णी बालासाहब को खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया करते थे. एक दिन उन्होंने बालासाहब को अपने पास बुलाकर मुनगा की खेती करने की बात कही, जब बालासाहब मुनगा की खेती के लिए तैयार हुए तो गणेश कुलकर्णी ने ही उन्हें 4000 रुपये दिए. बालासाहब ने पहली ही खेती में 50 हजार का मुनाफा कमा लिया. इसके बाद 4 एकड़ में इसकी बुआई की और अब तो इसकी नर्सरी चला रहे हैं जो किसानों की जरुरत के हिसाब से पौधे तैयार करती है.

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बालासाहब ने अपनी मेहनत से ये मुकाम हासिल किया है. जिस जगह उनकी झोपड़ी हुआ करती थी आज वहां उनका अपना बंगला है. अपनी खेती के स्किल से उन्होंने हज़ारो किसानों को फ़ायदा पहुँचाया, इसके लिए उन्हें वसंतराव नाइक प्रतिष्ठान सम्मान मिल चूका है, इसके अलावा ड्रीम फाउंडेशन की तरफ से सम्मानित किया जा चूका है.

बालासाहब अब उनसे उन्नत बीज तैयार करने का तरीका सीखने कृषि विशेषज्ञ भी गांव पहुंच रहे हैं. उन्होंने तीन किताबें भी लिखी है, जिसमें करोड़पति बनवेल शेवगा ( करोड़पति बनाएगा मुनगा), अमरुद और सिताफल पर लिखी किताब शामिल है.

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