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ममता बनर्जी ने मुहर्रम के कारण दुर्गा प्रतिमा विसर्जन पर लगाई रोक

ममता बनर्जी दुर्गा पूजा

नई दिल्ली(रिपोर्ट अड्डा): बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तुष्टिकरण की राजनीति के आरोप लगातार लगते रहे हैं। खास तौर पर बीजेपी का आरोप है कि ममता एक खास समुदाय को खुश करने के लिए बहुसंख्यक आबादी के खिलाफ फैसले ले रही हैं। ममता का ये रवैया एक नहीं कई बार दिख चुका है। सरस्वती पूजा के दौरान स्कूल बंद रखने का फैसला हो. या फिर कमलेश तिवारी वाला मामला हो। अब ममता बनर्जी ने फैसला लिया है उस से बंगाल की राजनीति में बवाल मच सकता है। ममता बनर्जी ने मुसलमानों को खुश करने के लिए इस बार मुहर्रम के दौरान दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन पर रोक लगा दी है। ममता बनर्जी के ताजा फैसले के बाद बीजेपी ने बंगाल सरकार के खिलाफ मोर्चा ही खोल दिया है।

ममता बनर्जी ने जो आदेश दिया है उसके बारे में बताते हैं। इसके मुताबिक बंगाल में 30 सितंबर को शाम 6 बजे के बाद से 1 अक्टूबर तक दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन नहीं किया जा सकेगा। ममता बनर्जी ने ये फैसला लेते समय येे भी नहीं सोचा कि इस से राज्य की राजनीति में कितना असर पड़ेगा। ममता ने कहा कि मुहर्रम के जुलूस के कारण दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन पर ये रोक लगी रहेगी। दुर्गा प्रतिमा विसर्जित करने वाले श्रद्धालु विजयदशमी को शाम 6 बजे तक ही दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन कर पाएंगे। खास बात ये है कि ममता बनर्जी इस तरह के फैसले हर साल लेती हैं।

इस साल मुहर्रम एक अक्टूबर को पड़ रहा है। पिछले साल भी इसी दौरान ममता ने इसी तरह का फैसला लिया था। पिछले साल विजयदशमी के मौके पर मूर्ति विसर्जन करने पर रोक लगा दी थी। जिसका काफी विरोध हुआ था। बता दें कि पिछले साल दशहरा 11 अक्टूबर को था,और उसके ठीक एक दिन बाद यानि 12 12 अक्टूबर को मुहर्रम था। ममता बनर्जी के मुसलमानों को खुश करने के इस फैसले के बाद राजनीति गरमा सकती है। इस मामले को लेकर कोलकाता हाईकोर्ट से भी ममता सरकार को फटकार लग चुकी है। लेकिन उसके बाद बी ममता इस तरह के सांप्रदायिक फैसले ले रही हैं।

बता दें कि कोलकाता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी के फैसले के खिलाफ दाखिल एक याचिका पर सुनवाई करते हुए फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि इस तरह के फैसले से सरकार एक समुदाय को रिझाने की और खुश करने की कोशिश कर रही है। कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा था कि इससे पहले कभी विजयदशमी के मौके पर मूर्ति विसर्जन पर रोक नहीं लगी थी। कोलकाता हाईकोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता की सिंगल बेंच ने 1982 और 1983 का भी उदाहरण दिया, जब दशहरे के अगले दिन ही मुहर्रम मनाया गया था, लेकिन मूर्तियों के विसर्जन पर रोक नहीं लगी थी। कुल मिलाकर ममता बनर्जी ने इस फैसले के जरिए अपने पतन का दरवाजा खोल दिया है। बीजेपी तेजी से बंगाल में अपनी पैठ बना रही है। ममता के इस फैसले के बाद बीजेपी को और फायदा होने की संभावना है। राज्य के बहुसंख्यक समुदाय में भी इस फैसले को लेकर काफी रोष है।

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