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लालू और नीतीश में ठनी, यूपी चुनाव लड़ने को लेकर जंग

Nitish Kumar vs Lalau yadav
बिहार में महागठबंधन की सरकार है। इस गठबंधन को दो मजबूत पाए हैं लालू और नीतीश कुमार, नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं तो लालू के दोनों बेटों को बिहार सरकार में शामिल किया गया है। अब नीतीश कुमार बिहार के बाद यूपी की सियासत में दम दिखाना चाहते हैं। लेकिन इस मुद्दे पर लालू यादव के साथ उनके विचार मेल नहीं खा रहे हैं। दोनों के बीच यूपी चुनाव को लेकर जारी अनबन महागठबंधन के भविष्य पर सवाल खड़े कर रही है।

नीतीश कुमार जहां यूपी में चुनाव लड़ने पर अड़े हुए हैं। वहीं लालू यादव यूपी से दूर रहना चाह रहे हैं। लालू के इस फैसले के पीछे की एक वजह उनके पारिवारिक रिश्ते भी हैं। लालू की बेटी यूपी की सियासत से पुरोधा मुलायम सिंह के भतीजे से ब्याही है। वो नहीं चाहते हैं कि उनके चुनाव लड़ने के फैसले से मुलायम सिंह की सियासत को धक्का लगे। हालांकि लालू कहते हैं कि उनका मुख्य मकसद संघ औऱ बीजेपी को रोकना है। इसके लिए वो धर्मनिरपेक्ष ताकतों का समर्थन करेंगे।

वहीं नीतीश कुमार की राय लालू से अलग है। वो राष्ट्रीय नेता बनने की महत्वकांक्षा पाले बैठे हैं। साल 2019 में कुध को पीएम पद का दावेदार मान रहे हैं। लिहाजा उस से पहले यूपी की सियासत में अपना दम दिखाना चाह रहे हैं। नीतीश कुर्मी समुदाय से आते हैं। इसी समुदाय के बल पर वो यूपी में अपनी ताकत दिखाना चाह रहे हैं। खास बात ये है कि उनका भी मुख्य मकसद बीजेपी को रोकना ही है।

फिलहाल यूपी में जो समीकरण बन रहे हैं उनमें नीतीश कुमार के लिए ज्यादा संभावनाएं नहीं दिख रही हैं। नीतीश को ये भी ध्यान रखना होगा कि साल 2012 में हुए चुनाव में उन्हे और लालू को यूपी में एक भी सीट नहीं मिली थी। कहीं ऐसा न हो कि वो यूपी के चक्कर में बिहार की सत्ता खतरे में डाल दें। महत्वकांक्षा अच्छी बात है लेकिन अपनी चादर देख कर पैर फैलाना चाहिए। लालू वैसे भी सियासत के माहिर खिलाड़ी हैं। नीतीश की एक गती औऱ लालू उसका फायदा उठा लेंगे।

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1 Comment

  • Lallu Yadav and Nitesh Kumar are two opposite pole ,but to capture the power both united and got the power .Both are very ambitious and wish to capture power in the year 2019.Ideology of both are too different ,all yadav has no ethic where as Nitesh is better and has some ethic.There is a personality clash.Let us wait for the time when they break their friendship and Nitesh may ask for fresh election .

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