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तो क्या अब केजरीवाल की पत्नी बनेंगी दिल्ली की मुख्यमंत्री !

kejriwal wife sunita kejriwal

नई दिल्ली(रिपोर्ट अड्डा): आम आदमी पार्टी की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही। दिल्ली का सियासी घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। कभी पार्टी के आधार स्तम्भ रहे पार्टी के सदस्यों ने मोर्चा खोल रखा है। कुमार विश्वास नाम की मुसीबत टली नहीं की केजरीवाल के सामने कपिल मिश्रा नामक मुसीबत खड़ी हो गई। Read Also : कुमार विश्वास ने केजरीवाल पर उठाए सवाल !

इन मुसीबतों के बीच अब दिल्ली के सियासी गलियारों से एक नई खबर आ रही है। दिल्ली की सियासत में इनदिनों इस बात की चर्चा जोर-शोर से चल रही है कि दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल को मुख्यमंत्री बनाने की कवायद अंदरखाने में बड़ी तेजी से चल रही है।

सुनीता केजरीवाल एक पढ़ी लिखी और अपने पति की तरह अंतरमुखी स्वभाव मगर अपने ठोस निर्णय के लिए जानी जाती है। सुनीता इनदिनों अपने पति के राजनीतिक कार्यों में सक्रियता से साथ निभाती है। साथ ही पार्टी के हर पहलू पर निगरानी भी रखती रही है। Read Also : केजरीवाल अपने जीवन के सबसे कठिन दौर में पहुँच गए !

5 राज्यों के विधानसभा चुनावों तथा दिल्ली नगर निगम चुनावों में करारी हार के बाद आप पार्टी को एक बड़े बदलाव की जरूरत तो थी ही। अब ये जरूरत आप पार्टी को और शिद्दत से महसूस हो रही जब से कपिल मिश्रा ने मोर्चा खोला है।

कपिल मिश्रा के लगातार हमलें और अरविंद केजरीवाल की चुप्पी के संकट से आप पार्टी को उबारने के लिए सुनीता से बेहतर विकल्प क्या हो सकता है? सुनीता को अपनी गद्दी सौंपने में केजरीवाल को भी कोई आपत्ति नहीं होगी। कपिल मिश्रा ने पार्टी और सीएम को जिस बवंडर में फंसा दिया है, उस बवंडर से सुनीता ही बाहर निकाल सकती है।
पार्टी के रणनीतिकार इस बड़े संकट से उबरने के लिए सुनीता को आगे लाने की कवायद में है। कपिल मिश्रा जिस तरह से पार्टी के लिए संकट बनते जा रहे उससे विपक्ष को भी मुद्दा मिल रहा। केजरीवाल का इस्तीफा और उनकी कुर्सी पर पत्नी सुनीता का आना ही कपिल रूपी संकट का हल है।

अरविंद के सामने पार्टी को बचाये रखने और अपनी साख बचाने की दोहरी चुनौती आन पड़ी है। ऐसे में अगर ऐसा हुआ तो अरविंद एक तीर से कई निशाने साध सकते है। एक ओर पार्टी पर पकड़ मजबूत दूसरी ओर महिला मुख्यमंत्री को विरोधी भी सहजता से निशाना नहीं बना सकते।

सुनीता द्वारा कपिल के जवाबी ट्वीट और उनके ट्विटर का इतिहास खंगालने के बाद इतना तो साफ है कि सुनीता आप पार्टी और केजरीवाल के लिए तारणहार साबित हो सकती है।

सुनीता ने जब से अपनी नौकरी से वीआरएस लिया है। तब से लगातार राजनीति में सोशल मीडिया के जरिये सक्रिय है। जब कपिल ने अरविंद के साडू पर आरोप लगाया तो सुनीता अपने बहनोई के बचाव में उतरी और उन्होंने ट्वीट किया कि “उनके बहनोई इस दुनिया में नहीं है फिर भी ये बेवकूफ आदमी बिना दिमाग लगाये लिखी हुई स्क्रिप्ट बोल रहा है।” सुनीता के इस ट्वीट से राजनीतिक मामलों में उनकी सक्रियता का पता चलता है। उनकी इस ट्वीट ने पार्टी को एक इमोशनल मुद्दा भी प्रदान किया है।

वैसे भी सुनीता अपने पति का हर कदम पर साथ देती रही है। इंडिया अगेंट्स करप्शन के समय से वो हमेशा वो अरविंद के सियासी कदम में उनकी हमकदम रही है। अरविंद को नजदीक से जानने वालों का मानना है कि केजरीवाल के भले ही कोई कितना करीब हो, लेकिन वो किसी पर आँख मूंद कर भरोसा नहीं करते। ऐसे में पार्टी को बवंडर से उबारने के लिए सुनीता ही राइट च्वाइस है।

चौतरफा संकटो से घिरे अरविंद अगर अपनी पत्नी को दिल्ली की सत्ता सौंपते है तो यह भारतीय राजनीति की पहली ऐसी घटना नहीं होगी। इससे पहले लालू प्रसाद यादव जब विवादों में घिरे तो उन्होंने बिहार की सत्ता अपनी पत्नी राबड़ी देवी को सौंपी थी। और राबड़ी को बिहार की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का गौरव प्राप्त हुआ था। ऐसे में सुनीता का दिल्ली की सीएम बनना दिल्ली की राजनीति और आप पार्टी को नया आयाम देगी। और दिल्ली को शीला दीक्षित के बाद एक और महिला मुख्यमंत्री।

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