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केजरीवाल के फार्मूले को कितना तोड़ पाएंगे प्रशांत और योगेंद्र ?

Kejriwal Prashant Yogendra

2 अक्टूबर को प्रशांत और योगेंद्र की पार्टी का अधिकारिक तौर पर एलान हो जाएगा। पार्टी के नाम का एलान भले ही अक्टूबर में होगा लेकिन पंजाब और दिल्ली चुनावों की जमीन अभी से तैयार करनी शुरु की चुकी है। योगेंद्र और प्रशांत का कहना है कि वो उस स्वराज को हासिल करने के लिए जूझ रहे हैं जिसको हासिल करने के लिए कभी केजरीवाल के साथ अन्ना के मंच से निकले थे।

बाहरी तौर पर भले ही प्रशांत और योगेंद्र ये दावा कर लें कि कि वो स्वराज के लिए निकले हैं लेकिन इस वास्तविकता से इनकार नहीं किया जा सकता है कि मकसद केजरीवाल को सबक सिखाना है। किसी भी मंच से दोनों के मन की टीस को महसूस किया जा सकता है।

योगेंद्र और प्रशांत उन सारी रणनीतियों से वाकिफ है जो केजरीवाल एंड टीम के मन में चलती है लेकिन सवाल ये पैदा होता है कि क्या उनकी इतनी सुनवाई होगी। योगेंद्र और प्रशांत की काबिलियत पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है लेकिन केजरीवाल जैसी शख्सियत का न होना, पार्टी के लिए मुश्किल होगा।

योगेंद्र और प्रशांत मीडिया को तो अपने सामने ला सकते हैं लेकिन केजरीवाल की तरह के क्राउड पुलर का होना जरूरी है। उनकी तर्कसंगत बातों को मीडिया बाइट के तौर पर दिखा तो सकता है लेकिन बयान के दम पर मीडिया डिबेट कराना मुश्किल होगा। लिहाजा इस पर संशय है कि जिस गति से आम आदमी पार्टी का प्रचार और प्रसार हुआ था उतनी ही तेजी से स्वराज अभियान को प्रसिद्धि मिलेगी।

इसके अलावा जो नाराजी आप को लेकर उभरी है,. उसका सामना भी करना पड़ सकता है, इसलिए योगेंद्र और प्रशांत को केजरीवाल के खिलाफ कुछ दूसरी रणनीति इजाद करनी होगी।

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