अरविंद केजरीवाल EVM issue

नई दिल्ली(रपोर्ट अड्डा): आखिरकार ये साबित हो गया कि केजरीवाल केवल आरोप लगाने की राजनीति करते हैं। उन्हे कोई चुनौती दे कि वो अपने आरोप साबित करके दिखाएं तो वो भाग खड़े होते हैं। दिल्ली की जनता के साथ खिलवाड़ करने वाले केजरीवाल ने ईवीएम को लेकर जिस तरह से ड्रामा किया था। उसका भांडाफोड़ हो गया है। लगातार ईवीएम में खराबी की बात करने वाले केजरीवाल अक्सर ये कहते थे कि वो आईआईटी के इंजीनियर हैं। 10 मिनट के अंदर ईवीएम को हैक करके दिखा सकते हैं।

दिल्ली विधानसभा के अंदर बकायदा विशेष सत्र बुलाकर नकली ईवीएम को हैक करने की नौटंकी भी की थी। सौरभ भारद्वाज ने नकली ईवीएम को हैक करके जनता को मूर्ख बनाया था। लगातार उठ रहे सवालों को देखते हुए चुनाव आयोग ने सभी सियासी दलों को चुनौती दी थी। चुनाव आयोग ने कहा कि 3 जून को जो भी चाहे ईवीएम को हैक करने की अपनी कोशिश कर सकता है।

इस कोशिश के लिए 26 मई तक आवेदन करना था। लेकिन ईवीएम में खराबी के मुद्दे को राष्ट्रीय मुद्दा बनाने वाले अरविंद केजरीवाल यहां भी भाग खड़े हुए। चुनाव आयोग की चुनौती को स्वीकार करना तो दूर केजरीवाल के मुंह से एक शब्द तक नहीं निकल रहा है। उनकी पार्टी ने अपने किसी भी प्रतिनिधि को EVM हैक करने के लिए नहीं भेजा है। आप से ज्यादा बहादुर तो एनसीपी निकली, जिसने चुनाव आयोग के चैलेंज को स्वीकार करते हुए अपने प्रतिनिधि के लिए आवेदन किया है। Read Also: दिल्ली में केजरीवाल की सबसे बड़ी बेइज्जती, जनता ने दिखाया ठेंगा !

अब साफ हो गया है कि केजरीवाल केवल गरजने वाले बादल हैं। वो केवल आरोप लगाकर सुर्खियों में रहना चाहते हैं। अरुण जेटली, नितिन गडकरी और अब ईवीएम पर आरोप लगाकर वो पछता रहे हैं। गडकरी से माफी मांग कर कोर्ट के बाहर समझौता किया। जेटली ने 20 करोड़ रूपये का मानहानि का दावा ठोंका है। अब ईवीएम के मु्दे पर भी अरविंद केजरीवाल की फजीहत हो रही है। केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के भागने के कारण ईवीएम अपने आप बेदाग साबित हो गई है। यानि अग्नि परीक्षा से पहले ही ईवीएम पवित्र साबित हो गई। दिल्ली की जनता भी देख ले कि उसने किस शख्स के हाथ में दिल्ली की सत्ता सौंप दी है। जो बिना कोई विभाग लिए केवल आरोप लगाने की राजनीति करता है।

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