Indian army achieved great success against terrorism

नई दिल्ली(रिपोर्ट अड्डा): देश में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का शोर सुनाई दे रहा है। हर तरफ चुनाव की ही बात हो रही है। गोवा और पंजाब में मतदान हो चुका है। अब उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मणिपुर में मतदान होना है। चुनाव के शोर के बीच कई सारी खबरें दब कर रह जाती है। ऐसी ही एक खबर है

भारतीय सेना के बारे में। चुनाव के शोर के बीच सेना के पराक्रम की ये खबर भी दबकर रह गई। हम आपको बताते हैं कि सेना ने इस बार क्या किया है।भारतीय सेना ने आतंकवाद के खिलाफ एक बार फिर से बड़ी सफलता हासिल की है। सेना ने घाटी में आतंकियों के नेटवर्क को तोड़ने में कामयाबी हासिल कर ली है। आतंकियों के अलगाववादियों के साथ कनेक्शन को सेना ने पूरी तरह से तोड़ दिया है। यही कारण है कि पिछले कुछ दिनों से घाटी में आतंकी घटनाओं में तेजी से कमी आई है। बता दें कि अलगाववादी आतंकियों और पाकिस्तान के बीच पुल का काम करते हैं।

ऐसे एक नहीं कितने ही सबूत सामने आ चुके हैं जिनके मुताबिक घाटी के अलगाववादी अफने फायदे के लिए आतंकियों की मदद करते हैं। ये भी सामने आ चुका है कि अलगाववादी नेता पाकिस्तान में आतंकियों के आकाओं के सफर्क में भी रहते हैं। सेना पिछले काफी समय से इस नेटवर्क को तोड़ने में लगी हुई थी। केंद्र सरकार की तरफ से इशारा मिलने के बाद तो सेना ने अलगावादियों को सबसे पहले अपने निशाने पर लिया। सेना ने अलगाववादियों के पीछे अपने भूत रूपी जासूस छोड़ दिए। उनकी हर हरकत पर नजर रखी जा रही थी

जैसे जैसे इन लोगों के आतंकियों के साथ कनेक्शन मिलते गए वैसे वसे आतंकियों के खिलाफ एक्शन लिया जाने लगा। इस तरह से घाटी में आतंकियों को पनाह देने वाले लोग लगातार कम होते गए। इसके अलावा नोटबंदी के बाद जिस तरह से टेरर फंडिंग पर लगाम लगी है वो भी सेना के काम आ रहा है। दरअसल अलगाववादी नेता पाकिस्तान से मिलने वाले पैसे की मदद से पत्थरबाजों की फौज खड़ी करते थे। लेकिन अब ये पूरा नेटवर्क नेस्तनाबूत हो चुका है। ये है भारतीय सेना की वो कामयाबी जिसके बारे में कोई बात नहीं कर रहा है। हर तरफ बस चुनावों का शोर है और सेना खामोशी के साथ अपने काम में लगी हुई है।

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