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लद्दाख में चीनी सेना की घुसपैठ की कोशिश, भारतीय जवानों वापस खदेड़ा

भारत और चीन विवाद

नई दिल्ली(रिपोर्ट अड्डा): चीन लगातार भारत पर दबाव बना रहा है। डोकलाम विवाद के चलते चीन और भारत के संबंध तनावपूर्ण हैं। चीन जंग की धमकी दे रहा है। लेकिन अब तो चीन ने हद ही कर दी है। चीनी सेना के जवानों ने डोकलाम के बाद लद्दाख में घुसपैठ करने की कोशिश की। लेकिन वहां पर मुस्तैद भारतीय जवानों ने न सिर्फ चीनी सैनिकों की घुसपैठ को नाकाम किया, बल्कि उन्हें वापस चीन की सीमा में खदेड़ दिया। लद्दाख के पैगॉन्ग झील इलाके में ये घटना हुई थी। भारतीय सेना के जवानों से मात खाने के बाद चीनी सैनिकों ने पत्थरबाजी का सहारा लिया। अपनी सीमा तक खदेड़े जाने के बाद चीनी सैनिकों ने भारतीय जवानों पर पत्थरबाजी की।

चीन ने कर दी बड़ी गलती
चीनी सैनिकों की पत्थरबाजी का मुंहतोड़ जवाब भारतीय जवानों ने भी दिया। भारतीय सेना का सीधा सिद्धांत है, गोली का जवाब गोली और पत्थर का जवाब प्थर, इस पत्थरबाजी में दोनों तरफ के 2-2 सैनिकों के घायल होने की खबरें आ रही है। लगभग 30 मिनट तक दोनों सेनाओं के बीच ये घटना हुई। बता दें कि डोकलाम के बाद अब चीन ने लद्दाख में भी अपनी दबंगई दिखानी शुरू कर दी है। भारतीय सेना की तरफ से बताया गया कि चीन के सैनिक दो इलाकों फिंगर फोर और फिंगर फाइव के जरिए सुबह 6 से 9 के बीच भारत की सीमा में घुसने की कोशिश कर रहे थे। वहां पर मौजूद भारतीय जवानों ने उनकी कोशिश को नाकाम कर दिया।

चीनी सैनिकों को मारकर भगाया
हालांकि चीन के सैनिक फिंगर फोर इलाके में घुसपैठ करने में सफल हो गए थे। लेकिन भारतीय जवानों ने वापस उन्हें चीनी सीमा में धकेल दिया। जब चीनी सैनिकों को लगा कि ये कोशिश नाकाम हो गई तो उन्होंने भारतीय सैनिकों पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। इसके जवाब में भारतीय जवानों ने भी पत्थरबाजी से उनको करारा सबक सिखाया। पत्थरबाजी में दोनों सेनाओं के 2-2 जवानों के घायल होने की खबर आ रही है। हालांकि थोड़ी देर बाद ही स्थिति भारतीय सेना के काबू में आ गई। नई दिल्ली में सेना के एक प्रवक्ता ने इस मसले पर किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।

भारत और चीन दोनों का दावा
बता दें कि जिस इलाके में ये झड़प हुई है वहां पर भारत और चीन दोनों अपना-अपना दावा करते रहे हैं। इसका इतिहास काफी पुराना है, जब भारत ने 1990 में बातचीत के दौरान इस इलाके पर अपना दावा किया था तो उसके बाद चीनी सेना ने यहां एक सड़क का निर्माण करके इसे अक्साई चीन का हिस्सा बताया था।  इस झील का 45 किलोमीटर का हिस्सा भारत में है, जबकि 90 किलोमीटर हिस्सा चीन के पास है। जैसे जैसे भारतीय सेना आधुनिक होती जा रही है चीन की बेचैनी बढ़ती जा रही है। इस इलाके में भारतीय सेना अमेरिका से खरीदी गई हाई स्पीड बोट के जरिए निगरानी करती है। इस बोट पर करीब 15 जवान सवार हो सकते हैं।

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