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ये पांच आंकड़े पढ़ ले चीन, मोदी और भारत की ताकत का पता चल जाएगा !

भारत और चीन तनाव

नई दिल्ली(रिपोर्ट अड्डा): भारत को धमकी देने वाला चीन शायद इस बात से अंजान है कि अब भारत 1962 के दौर से निकल चुका है। बड़ी देश और बड़ी सेना होने के बाद भी चीन भारत से खौफ खाता है। इसका कारण ये है कि केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद से देश कई सेक्टरों में तेजी से आगे बढ़ा है। भारत की इसी तरक्की से चीन परेशान रहता है। बिजनेस, सेना, और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हम आपको भारत की पांच उपलब्धियों के बारे में बताएंगे। जिनसे चीन को जलन होने लगेगी। जी हां सबसे पहले बात करते हैं विदेशी निवेश के बारे में। भारत सबसे ज्यादा विदेशी निवेश लाने के मामले में चीन से आगे निकल गया है।

भारत को 2015 में 63 बिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश मिला था तो वहीं चीन को महज 56 बिलियन और अमेरिका को केवल 59 बिलियन डॉलर मिला था। ये आंकड़े चीन के महत्वकांक्षी योजना मेक इन चीन के लिए झटका है। चीन की कोशिश एक बार फिर विदेशी निवेश के मामले में भारत को पछाड़कर नंबर एक बनने की है। लेकिन मोदी सरकार के मेक इन इंडिया और ईज ऑफ डुईंग बिजनेस जैैसी योजनाओं से उसकी हालत खराब है। इसके अलावा भारत तेजी से मैन्यूफैक्चरिंग हब के तौर पर विकसित हो रहा है। मेक इन इंडिया के तहत भारत में विदेशी कंपनियां निवेश कर रही हैं। दुनियाभर से की कंपनियों ने डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग से लेकर फार्मा और मोबाइल से लेकर ऑटो मैन्यूफैक्चरिंग में भारत का रुख किया है।

इसके अलावा तकनीक के क्षेत्र में भारत का दबदबा किसी से छिपा वहीं है। खुद चीन ने माना कि वो इस मामले में भारत से पिछड़ गया है। भारत की इस महारत को चीन ने हाल में इसरो द्वारा एक साथ की गई 104 सैटेलाइट लॉन्च के समय स्वीकार किया था। चीन सरकार ने साफ साफ माना था कि भारत ने दुनियाभर में अपने इंजीनियर और वैज्ञानिकों के लिए बड़ी मांग पैदा की है और चीन इस मामले में भारत से काफी पीछे है। चीन सरकार पर दबाव इस बात का है कि वो आने वाले दिनों में भारत से उच्च स्तर के टेक्नोलॉजी और साइंटिफिक ब्रेन को अपने यहां खींचने की कोशिश करे। ऐसा नहीं करने पर उसे झटका लग सकता है।

इन के अलावा जिस तरह से भारत के संबंध दुनिया के ताकतवर देशों के साथ सुधर रहे हैं। खास तौर पर अमेरिका के साथ जिस तरह से भारत के रक्षा संबंध मजबूत हो रहे हैं उस से चीन परेशान है। भारत और अमेरिका ने 2015 में ही अपनी सेनाओं के लॉजिस्टिकल सपोर्ट, सप्लाई और सेवाओं के आदान-प्रदान पर समझौता किया था। इसे संचालित करने के लिए एक फ्रेमवर्क भी तय किया गया है। इस समझौते से अमेरिका और भारत के सैन्य मंत्रालय एक दूसरे के साथ तालमेल में काम करने के लिए सक्षम हैं। भारत और अमेरिका के बढ़ते संबंधों से चीन का परेशान होना स्वाभाविक है। इसी कारण साउथ चाइना सी में उसकी पकड़ कमजोर हो सकती है।

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