राष्ट्रीय

“राजनीति और परिवारवाद” में उलझता भारत, आम जनता की हो रही ये दशा !

India involved in politics and nepotism

मैं आज यह इस लिए कह रहा हूँ
क्यू की आज के समय में भारतीय राजनीति में परिवार वाद चरम पे है ।

हर हर पार्टी में कही न कही परिवारवाद दिखाई देता है , मैं नही कहता की नेता का बेटा या बेटी नेता नही बन सकता है ! भारतीये संविधान ने हर किसी को ये छूट दे रखा है की भारत का हर वो नागरिक चुनाव लड़ सकता है को इस की योग्यता रखता है !
लेकिन सवाल उठ खड़ा होता है की जिस व्यक्ति को कल तक कोई जानता नही है वह व्यक्ति आता है और पार्टी से टिकट ले कर चुनाव जीत कर सांसद या विधायक बन जाता है , क्यू की वह राजनेता का बेटा है इस के पिता का राजनीती में रसूख दार है , और पार्टी में उन की तूती बोलती है ।

यह बात कही से भी उचित नही है की जिस व्यक्ति को कल तक जनता जानती नही थी आज वह बस पार्टी और अपने राजनितिक विरासत के बल पर जनता का शासक बन बैठा है , इस के उदहारण के तौर पे आप समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश याद को देख लीजिए , वह ऑस्ट्रेलिया में पढाई कर रहे होते है और उन के पिता उन को वहा से बुलाते है और सीधा सांसद का चुनाव लड़ा कर उन को संसद भवन भेज देते है जब की इस से पहले उनका राजनीति से कोई लेना देना नही होता है ,
आप लालू के दोनों बेटो का भी उदाहरण ले सकते है जो कल तक पटना – दिल्ली में घूमते और मौज मस्ती करते है और एका एक उन के पिता उन को चुनाव लड़वा देते जबकि उन की उम्र भी नही थी चुनाव लड़ने की पर वह चुनाव जीत कर मंत्री और उप मुख्यमंत्री बन जाते है बिहार के,

खैर
मैं ये मानता हूँ की राजनीति में हर किसी को आने का हक़ है चाहे वह राज नेता का बेटा हो या एक गरीब का लेकिन उन के राजनीती में आने का तरिका सही होना चाहिए हर पार्टीयो को टिकट देने से पहले उन के राजनीतीक कैरियर को देखना चाहिए की यह व्यक्ति कितने समय से राजनीती में है और इस का क्या कार्य है राजनीती में , चाहे वह राजनेता का बेटा ही क्यू ना हो !
आप भारत के वर्तमान गृह मंत्री और भाजपा नेता राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह का उदाहरण देख सकते है वह लंबे समय से भाजपा से जुड़े रहे और पार्टी वर्कर केइ तौर पर पार्टी के लिए कार्य कर रहे थे तो आज पार्टी ने उन को टिकट दिया है और अगर उन्हें केवल इस लिए पार्टी टिकट से वंचित कर देती की वह राजनेता के बेटे है तो उन के साथ अन्याय होता , मैं मानता हूँ की ऐसे किसी व्यक्ति को पार्टीयो को टिकट नही देना चाहिए जिनका राजनीती से कोई वास्ता ना रहा हो और उन के नेता का सम्बन्धी होने का लाभ मिले और उन्हें पार्टी चुनाव में टिकट दे कर चुनाव जीता कर सरकार में भेज दे ऐसा व्यक्ति समाज के लिए घातक हो सकता है क्यू की इसे राजनीती की ABCD नही पता वह कैसे साशन व्यवस्था चलायेगा ?

क्या इस से समाज का भला हो सकता है क्या

जिस को ये तक नही पता की विधायक या सांसद का कार्य क्या क्या होता है वह व्यक्ति कैसे अच्छे समाज की कल्पना कर सकता है
जो कल तक भोगविलाष में व्यस्त था आज वह अचानक आ कर जनता के ऊपर साशन करने लगता है ।
आज चाहे वह भाजपा हो , कांग्रेस हो , समाजवादी पार्टी हो इन सब में परिवारवाद चरम पे है लेकिन इन सब में भाजपा में थोड़ी अलग दिखती है क्यू की इस में अभी तक इस में थोडा लोक तंत्र बचा है लेकिन जितनी भी क्षेत्रीय पार्टियां है उन में तो परिवारवाद चरम पर है
एक तरह से देखा जाय तो हम लोक तंत्र में नही लोक तंत्र के आड़ में हम राज तंत्र में जी रहे है जहां एक ही परिवार के कुछ लोहा पार्टी बना कर भारत के अलग अलग राज्य और भारत पे शासन कर रही है , इस में कुछ हद तक आप भाजपा और लेफ्ट जैसी पार्टीयो को इन से अलग कर के देख सकते है क्यू की इन पार्टीयो का अध्यक्ष और मंत्री , मुख्यमंत्री , कही न कही पार्टी के अंदर से चुन कर आता है वह भी कुछ समय के लिए इन पार्टियों में वंशवाद के तौर पर कोई व्यक्ति पार्टी के उच्च पद पर नह बैठ सकता है ।
खैर

बेचारी जनता क्या करेगी उनको तो अपनी पार्टी को वेट दे कर अपने दाइत्व का निर्वाहन करना है , राजनीति में भाई भतीजा वाद से ऊपर उठ कर जनता की भलाई के लिए कार्य करना चाहिए तभी जा कर समाज का कल्यांण हो सकता है तभी जा कर भारत का भविष्य उज्जवल होगा , अगर जनता ही खुश नही रहेगी तो भारत का आनेवाला भविष्य कैसे सुधर सकता है ।

ये लेखक के अपने विचार है

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