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अगर दिमाग लगाकर प्लानिंग के साथ कोई काम किया जाये तो सफलता मिलना तय है. देश की बड़ी आबादी आज भी कृषि पर निर्भर है. अगर खेती किसानी के स्किल्स को निखार जाये तो इस देश की तस्वीर बदलने में देर नहीं लगेगी. हमारे देश में ऐसे किसान है जो खुद को तो विकसित कर ही रहे हैं साथ ही अपने आस पास को किसानो को भी सिख रहे हैं, ताकि वो आत्मनिर्भर बन सकें. कर्ज और आत्महत्या के दम्भ से भी बचें. इन्ही तरह के किसानों की लिस्ट में आते हैं राजस्थान के सत्य नारायण यादव और उनकी पत्नी.

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राजस्थान के ग्राम खडब के ढाणी बामणा के रहने वाले सत्यनारायण यादव आज उनकी धर्मपत्नी सजना यादव ग्रामीण इलाको में सीप मोती पालन की खेती कर रहे है और स्वरोजगार के क्षेत्र को बढावा देकर पीएम मोदी के सपने को साकार कर रहे हैं. सत्यनारायण ने ICAR भुवनेश्वर में 15 दिनों की ट्रेनिंग ली थी और उसके बाद अपने गांव में सीप मोती की खेती करने लगे. उन्होंने इस्कियो शुरुआत मात्र 10 हजार रुपए की थी. आज वो सालाना 3-4 लाख रुपए सिर्फ सीप की खेती से कमा रहे हैं.

सत्य नारायण सिर्फ कमा नहीं रहे बल्कि अपने आस पास के लोगो को ट्रेनिंग भी दे रहे हैं. वो 150 से ज्यादा लोगों को ट्रेनिंग दे चुके हैं. सत्यनारायण ने सीप की खेती के लिए घर में ही पानी का हौज बना रखा है. सीप का खाना भी घर में तैयार करते हैं. वो अपने घर में हफ्ते में दो ही दिन काम करते हैं. बाकि दिन वो लोगों को ट्रेनिंग देने का काम करते हैं.

आइए जानते हैं कैसे होती है ये खेती…

प्राकृतिक रूप से एक मोती का निर्माण तब होता है जब एक बाहरी कण जैसे रेत, कीट आदि किसी सीप के भीतर प्रवेश कर जाते हैं या अंदर डाले जाते हैं और सीप उन्हें बाहर नहीं निकाल पाता जिसकी वजह से सीप को चुभन पैदा होती है. इस चुभन से बचने के लिए सीप अपने से रस (लार जैसा लिक्विड) स्राव करती है. जो इस कीट या रेत के कण पर जमा हो जाती है जो की चमकदार होती है.

सत्यनाराण शल्य क्रिया के माध्यम से सीप के अंदर 4 से 6 मिमी व्यास का कण अंदर डालते है, जैसे की ॐ का निशान, गणेश या फिर स्वस्तिक. 8 से 10 महीने बाद जब सीप को चीरा जाता है तो उसके अंदर से मोती मिलता है. अंतर्राष्टीय बाजार में इसकी काफी कीमत मिल जाती है.

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