Chanakya Niti in Marathi

चाणक्य नीति में कही गई बातें आज भी प्रभावी हैं। इन बातों को गलत नहीं ठहराया जा सकता है। इन्‍हें जिंदगी के हर पहलू में आत्मसात करते हुए बेहतर तरीके से जिंदगी का आनंद उठाया जा सकता है। चाणक्य कहते हैं…

  • उस देश में निवास न करें जहां आपका कोई सम्मान नहीं हो, जहां आप रोजगार नहीं कमा सकते, जहां आपका कोई मित्र नहीं और जहां आप कोई ज्ञान अर्जित नहीं कर सकते।

 

  • नौकर की परीक्षा तब करें जब वह कर्त्तव्य का पालन न कर रहा हो, रिश्तेदार की परीक्षा तब करें जब आप मुसीबत में घिरे हों, मित्र की परीक्षा विपरीत परिस्थितियों में करें, और जब आपका वक्त अच्छा न चल रहा हो तब पत्नी की परीक्षा करें।
  •  महिलाओं में पुरुषों की अपेक्षा भूख दो गुना, लज्जा चार गुना, साहस छः गुना और काम आठ गुना होता है।

 

  • व्यक्ति को आने वाली मुसीबतों से निबटने के लिए धन संचय करना चाहिए। उसे धन-सम्पदा त्यागकर भी पत्नी की सुरक्षा करनी चाहिए। यदि आत्मा की सुरक्षा की बात आती है तो उसे धन और पत्नी दोनों को तुच्‍छ समझना चाहिए।
  • अच्छा मित्र वही है जो हमें इन परिस्थितियों में नहीं त्यागे- पहला: आवश्यकता पड़ने पर, दूसरा: किसी दुर्घटना होने पर , तीसरा: जब अकाल पड़ा हो, चौथा: जब युद्ध चल रहा हो, पांचवां: जब हमें राजा के दरबार में जाना पड़े, और छठा: जब हमें श्मशान घाट जाना पड़े।

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