Budjet 2016 India Bjp

29 फरवरी को वित्‍त मंत्री अरुण जेटली वित्‍त वर्ष 2016-17 के लिए बजट पेश करेंगे। ये बजट यूं ही नहीं पेश हो जाता है। इसमें महीनों की मेहनत छिपी होती है। समझें बजट के बनने और इसके पेश होने से जुड़े सभी अहम बिंदुओं के बारे में

कौन बनाता है बजट

>बजट की निर्माण प्रक्रिया कई मंत्रालयों की आपसी मशविरा के साथ शुरू होती है। इस प्रक्रिया में वित्‍त मंत्रालय, नीति आयोग और शासकीय व्‍यय से जुड़े मंत्रालय शामिल होते हैं।
> वित्‍त मंत्रालय व्‍यय को लेकर कुछ गाइडलाइंस जारी करता है। इसके आधार ही मंत्रालय अपनी-अपनी डिमांड रखते हैं।
>वित्‍त मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स का एक डिविजन बजट बनाने से जुड़ी नोडल बॉडी है।

कैसे बनता है बजट

> सितंबर महीने में वित्‍त मंत्रालय का बजट डिविजन सभी केंद्रीय मंत्रालयों, राज्‍यों, केंद्र शासित प्रदेशों, स्‍वायत्‍त संस्‍थाओं, विभागों और डिफेंस फोर्सज को एक सर्कुलर जारी करता है। पूरे वित्‍त वर्ष में होने वाले कुल व्‍यय का आकलन करने के लिए इस सर्कुलर के जरिए सबकी डिमांड पूछी जाती है।
> मंत्रालय और सभी विभाग जब अपनी डिमांड भेज देते हैं तो इसके बाद वित्‍त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ एक्‍सपेंडीचर की मंत्रालयों व विभागों के साथ गहन सलाह मशविरा होता है।
> इसी दौरान, डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स और डिपार्टमेंट ऑफ रेवेन्‍यू किसानों, व्‍यापारियों, इंडस्‍ट्री से जुड़े लोगों, समाज के बुद्धिजीवियों आदि से बजट पर उनकी राय लेता है।
>जनवरी आखिर तक बजट से जुड़ी शुरुआती मीटिंग खत्‍म हो जाती हैं। इसके बाद टैक्‍स प्रपोजल पर वित्‍त मंत्री आखिरी फैसला लेते हैं। बजट का आखिरी मसौदा तय करने से पहले विभिन्‍न प्रस्‍तावों पर पीएम की भी राय ली जाती है।

कैसे पेश होता है बजट

>सरकार बजट पेश करने के लिए एक तारीख सुझाती है। इसके बाद लोकसभा सचिवालय के सेक्रेटरी जनरल राष्‍ट्रपति की इस पर मंजूरी मांगते हैं।
> बजट पेश किए जाने वाले दिन सुबह में केंद्र भारत के राष्‍ट्रपति को बजट का सारांश भेजकर मंजूरी मांगता है। इससे पहले, इससे जुड़े दस्‍तावेज को वित्‍त मंत्री और पीएम मंजूरी देते हैं।
> वित्‍त मंत्री लोकसभा में बजट पेश करते हैं। इसमें वे अहम बिंदुओं और प्रस्‍तावों का जिक्र करते हैं। बजट पेश करने से पहले वित्‍त मंत्री अपने कैबिनेट को इससे जुड़ी अहम बिंदुओं की जानकारी देते हैं।
> वित्‍त मंत्री के बजट भाषण के दो हिस्‍से होते हैं। पहले हिस्‍से में आर्थिक सर्वेक्षण और नीतिगत घोषणाओं का एलान होता है। दूसरे हिस्‍से में टैक्‍स से जुड़ी घोषणाएं होती हैं। वित्‍त मंत्री के भाषण के बाद राज्‍य सभा के पटल पर ‘एनुअल फाइनेंशियल स्‍टेटमेंट’ रखा जाता है।

कैसे पास होता है बजट

> जिस दिन बजट पेश होता है, उस दिन उस पर कोई चर्चा नहीं होती। हालांकि, कुछ दिनों बाद बजट पर दो हिस्‍सों में चर्चा होती है। पहला हिस्‍सा है जनरल डिस्‍कशन। यह लोकसभा में दो से तीन दिन चलती है। बहस के बाद वित्‍त मंत्री जवाब देते हैं। फिर वित्‍त वर्ष के शुरुआती महीनों में व्‍यय पर संसद की रजामंदी ली जाती है। इसके बाद, कुछ सीमित वक्‍त के लिए सदन की कार्यवाही रोक दी जाती है।
> अब बारी आती है विस्‍तृत बहस की। हालांकि, सदन की कार्यवाही में ब्रेक के दौरान अनुदान से जुड़ी विभिन्‍न मांगों पर संबंधित स्‍टैंडिंग कमेटियां विचार करती हैं। सदन की बिजनेस एडवाइजरी क‍मेटी की ओर से तय शेड्यूल के हिसाब से इन मांगों को एक-एक कर सदन में रखा जाता है।
> सदन का कोई भी सदस्‍य वितरित अनुदान में कटौती की मांग कर सकता है। इसके लिए वो तीन तरह के कट मोशन ला सकता है। डिस्‍अप्रूवल ऑफ पॉलिसी कट, इकोनॉमी कट, टोकन कट। अनुदान की मांग को लेकर होने वाली बहस के आखिरी दिन स्‍पीकर सभी मांगों को वोटिंग के लिए सदन में रखते हैं।
> इसके बाद लोकसभा में अप्रोप्रिएशन बिल वोटिंग के लिए पेश किया जाता है। इसके पास होने पर ही सरकार को भारत की जमापूंजी खर्च करने का अधिकार मिलता है।
> अप्रोप्रिएशन बिल के बाद फाइनेंस बिल पर विचार किया जाता है। संसद इसे मनी बिल के तौर पर पास करती है। बिल पेश किए जाने के 75 दिन के अंदर इसे दोनों सदनों और भारत के राष्‍ट्रपति की मंजूरी की जरूरत होती है। फाइनेंस बिल के पास होने और राष्‍ट्रपति के इसपर दस्‍तखत होने के बाद बजट प्रक्रिया संपन्‍न हो जाती है।

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