भारत और चीन के कूटनीतिक रिश्ते कुछ इस तरह के है कि सीमा पर तनाव हर वक्त बना रहता है. भारत चीन सीमा पर दोनों ओर के सैनिकों के बीच अक्सर तनातनी देखने को मिलती है. और हर बार भारतीय सैनिक चीनियों को खदेड़ने में कामयाब हो जाते हैं इस खास हिस्से में चीन के सैनिक सपने में भी आने की नहीं सोचते हैं. भारतीय सैनिकों के जवानों का मनोबल भी इस जमीनी टुकड़े पर बुलंदी पर रहता है क्योंकि वह धरती है जहां पर है हरभजन सिंह का मंदिर.

सिक्किम की राजधानी गंगटोक में जैलेप्ला और नाथुला दर्रे के बीच में बना हुआ है हरभजन सिंह मंदिर यह मंदिर किसी भगवान का नहीं है. लेकिन यह जिस वीर जवान की बात हो रही है वह भी भारतीय सैनिकों के लिए किसी भगवान से कम नहीं है. 4 अक्टूबर 1968 में सिक्किम की नाथुला के पास गहरी खाई में गिरने से हरभजन सिंह नाम के सैनिक की मौत हो गई थी लोगों का ऐसा कहना है तब से लेकर आज तक इस वीर जवान की आत्मा सरहदों पर रक्षा करती है.

सीमा पर तैनात कई जवानों ने बताया कि उन्होंने बाबा हरभजन सिंह जिन्हें बाबा बॉर्डर के नाम से भी जाना जाता है ,को सीमा पर रखवाली करते देखा है. लोग कहते हैं कि मरने के बाद बाबा घोड़े पर सवार होकर सीमा की गश्त करते हैं. ऐसा सिर्फ भारतीय सैनिक ही नहीं कहते बल्कि सीधी बल्कि चीनी सैनिक भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि बाबा हरभजन सिंह मरने के बाद भी देश की रक्षा कर रहे हैं. कई चीनी सैनिकों ने अपने कमांडर को इस बारे में आगाह किया है कि सीमा पर बाबा हरभजन सिंह गश्त करते देखे गए हैं.Baba Harbhajan Singh temple on the border

इसी मान्यता के साथ बॉर्डर पर बाबा हरभजन सिंह का एक मंदिर स्थापित किया गया है, सैनिक की इस मंदिर के लिए अटूट आस्था है. पोस्टिंग के दौरान और पोस्टिंग से हटने के बाद भी इस सैनिक इस मंदिर में एक बार माथा टेकने जरूर आते हैं. न सिर्फ सैनिक बल्कि वहां गया सैलानी भी बाबा हरभजन सिंह की दहशत को चीनियों की आंखों पर महसूस कर सकता है. ऐसा सिर्फ भारत के जवान ही कर सकते हैं क्योंकि उन्हीं की आंखों में तिरंगा दिल में तिरंगा और कफन पर भी तिरंगे खराब लिखा होता है.

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