घरेलू आयुर्वेदिक नुकसान

घरेलू आयुर्वेदिक नुकसान

आयुर्वेद का जिक्र आने के साथ ही आपको कई ऐसे ज्ञानी लोग मिल जाएंगे जैसे वो आयुर्वेद के सबसे बड़े ज्ञाता हैं. आयुर्वेद इलाज का सबसे अच्छा साधन है, इस से बीमारी का धीमा लेकिन सॉलिड इलाज होता है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि आयुर्वेद हमेशा अच्छा ही होता है, लोग कहते हैं कि आयर्वेद का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। ये बात पूरी तरह से गलत है। आपको इस बात का ध्यान हमेशा रखना चाहिए कि आयुर्वेद के नुस्खों में सही मात्रा का होना बहुत जरूरी है। हम आपको कुछ ऐसे ही आयुर्वेदिक नुस्खों के बारे में बताएंगे जो हानिकारक साबित हो सकते हैं।

खुद ही डॉक्टर ना बनें
दरअसल लोगों ने आयुर्वेद को बहुत हल्के में ले लिया है। लोगों को लगता है कि वो कोई भी काढ़ा टाइप का पदार्थ तैयार कर लेंगे, और वो बीमारी को दूर कर देगा। ये गलत है, आयुर्देकि नुस्खे काफी रिसर्च के बाद बनाए जाते हैं। इसलिए जड़ी बूटियों का सही इस्तेमाल और सही मात्रा के बारे में पता होना बहुत जरूरी है। इसलिए बीमारी की हालत में खुद ही डॉक्टर ना बन जाया करें।

आयुर्देकि नुस्खों के नुकसान
क्या आप जानते हैं कि आयुर्वेद में जामुन का उपयोग बहुत प्रभावशाली माना गया है। मतलब जामुन और उसकी गुठली बहुत से रोगों में लाभकारी होती है। लोग डायबीटीज को कंट्रोल करने के लिए जामुन की गुठली के चूरन का सेवन करते हैं। इसमें कई तरह के मिनरल जैसे कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम और विटमिन सी होता है। ये हड्डियों के लिए फायदेमंद तो है ही, साथ ही प्रतिरोधी क्षमता को भी बढ़ाता है।

जामुन का नुकसान
जामुन के इतने फायदे हैं तो भला नुकसान क्या हो सकता है। इसका ज्यादा सेवन करने से पाचन तंत्र कमजोर हो सकता है क्योंकि इसको पचाने में बहुत समय लगता है।साफ है कि जो लोग केवल ये सोचकर जामुन की गुठली का प्रयोग करते हैं कि ये डायबिटिज को कंट्रोल करता है वो गलत है। आप जो चीज प्रयोग कर रहे हैं उसके बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए।

गिलोय का गलत असर
आयुर्वेद और गिलोय का पुराना संबंध है। हाल के दिनों में इसके गुणों के बारे में जनता को पता चला है कि ये डेंगू की बीमारी में भी बहुत फायदेमंद होता है। गिलोय में डायबीटीज से लड़ने के गुण होते हैं और यह चीनी खाने की इच्छा को कम करता है। इसका नकारात्मक प्रभाव ये होता है कि गिलोय का ज्यादा सेवन शुगर लेवल को प्रभावित कर पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है।

करेले का जूस
इसी तरह से आयुर्वेद में करेले को बहुत ही प्रभावकारी माना जाता है। कई तरह की बीमारियों में करेले के जूस का सेवन किया जाता है। करेले का जूस ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करता है। इसका नकारात्मक असर ये है कि इसका ज्यादा सेवन पाचन तंत्र को खराब कर सकता है और इससे ऐलर्जी भी हो सकती है। तो करेले के जूस का सेवन करते समय इस बात का ध्यान रखें।

मेथी के साइड इफेक्ट
हर घर में पाया जाने वाला मेथी का दाना भी नुकसानदेह हो सकता है। मेथी का दाना पेट से संबंधी तकलीफों में फायदेमंद माना गया है। मेथीदाने का उपयोग हाई बीपी और पेट संबंधी समस्या में फायदेमंद है।लेकिन मेथी का स्वभाव गर्म होता है। ज्यादा मात्रा में खाने से पित्त बढ़ता है। इससे गैस और सूजन की समस्या हो सकती है। तो बिना जाने मेथी का प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है।

दालचीनी के नुकसान
दालचीनी का प्रयोग खाने में स्वाद लाने के लिए किया जाता है। आयुर्वेद के मुताबिक दालचीनी का इस्तेमाल वजन कम करने और पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में किया जाता है। इसमें 5% कॉमरिन पाया जाता है, इसलिए इसके ज्यादा सेवन से लिवर को नुकसान हो सकता है। तो ये वो नुस्खे हैं जो आयुर्वेद के नाम पर लोग अपने आप इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इनके गुणों के बारे में जानकारी नहीं होने से नुकसान हो सकता है। खास तौर पर कौन सी चीज कितनी मात्रा में इस्तेमाल करनी है इसके बारे में जानकारी होना बहुत जरूरी है।

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