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मोदी का अपमान करके केजरीवाल अपने जीवन के सबसे कठिन दौर में पहुँच गए, सब छोड़ देंगे साथ !

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नई दिल्ली (रिपोर्ट अड्डा): दिल्ली नगर निगम चुनावों में हार के बाद आप पर वो लोग भी सवाल उठा रहे है जो कभी उनके समर्थन में थे। MCD चुनाव 2017 में आम आदमी को मिली करारी शिकस्त के बाद उठा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा। पार्टी में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है। आप के बड़े नाम पार्टी में एक दूसरे पर कीचड़ उछाल रहे। पार्टी नेतृत्व में घमासान मचा है।

हर बड़ा चेहरा आप से अलग हो रहा है। MCD के बाद आप में इस्तीफों का सिलसिला शुरू हो गया है। आप पार्टी दिल्ली यूनिट के संयोजक दिलीप पांडे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।पार्टी के नेता पार्टी से विमुख हो रहे है। जिसमें कुमार विश्वास भी शामिल है। आप के स्टैंड से अलग विश्वास ने कहा कि MCD चुनाव EVM ने नहीं, बल्कि जनता ने पार्टी को हराया। विश्वास ने कहा कि केजरीवाल को सर्जिकल स्ट्राइक पर पीएम मोदी पर हमला नहीं बोलना चाहिए था।

आप के पंजाब के पार्टी प्रभारी के पद से संजय सिंह ने भी खुद को अलग कर लिया। दुर्गेश ने भी सह प्रभारी पद छोड़ दिया। अलका लांबा ने भी अपने इस्तीफे की पेशकश की है।

अन्ना हजारे ने MCD चुनावों में केजरीवाल की हार पर तंज कसते हुए कहा था कि वो सत्ता के भूखे हैं और विश्वसनीयता खो चुके है। साफ है केजरीवाल के सियासी तौर तरीकों से अन्ना का दिल टूट गया है। यही वजह है केजरीवाल की तरक्की से गर्व महसूस करते थे वो अब खुद को उनका गुरु कहलवाने में अपमान महसूस करते है। अन्ना के मुताबिक जिन आदर्शों के साथ आम आदमी पार्टी जि शरुआत हुई थी, सत्ता के दौर में वो आदर्श कहीं पीछे छूट चुका है।

दिल्ली के सीएम केजरीवाल अपने सियासी जीवन के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे है। लगातार हार ने उनकी नीतियों पर सवाल खड़ा कर दिया है।

अन्ना ने केजरीवाल पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। अन्ना ने राइट टू रिकॉल लागू करने मांग की। अन्ना के हमले के बाद आप पार्टी सकते में है। अन्ना के खिलाफ पार्टी ने मोर्चा खोल दिया है। इसी बीच दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने एक ऐसे ट्वीट को रीट्वीट कर दिया है जिसमें अन्ना को BJP का एजेंट बताया गया है। इसके साथ ही उन्होंने एक और ट्वीट को रीट्वीट किया है जिसमें कहा गया है कि अन्ना केजरीवाल को कोसने का मौका नहीं छोड़ते पर लोकपाल नियुक्त करने की मोदी की असफलता पर वह खामोश क्यो है? सिसोदिया को यह ट्वीट इतना भाया की उन्होंने इसे रीट्वीट कर दिया। इसका मतलब है की इसमें सिसोदिया की मौन सहमति है। अन्ना आंदोलन की उपज सिसोदिया की नजर में अन्ना फ्रॉड और BJP एजेंट है। हालांकि बाद में मनीष ने कहा कि उनका ट्वीटर एकाउंट हैक हो गया है।

गौरतलब है की एक वीडियो सामने आया है जिसमें कांग्रेस काल में हुए EVM घपले पर अन्ना खिलाफ है। पर जब मोदी काल में सब EVM को दोष दे रहे तो अन्ना इस पर चुप्पी साधे है। उन्हें सोशल मीडिया पर BJP का दलाल कहते हुए कहा जा रहा कि BJP के शासन में उन्होंने नोटबन्दी और लोकपाल को लेकर कोई जनांदोलन नही किया।

अन्ना के बारें में जितनी तल्ख टिप्पणी मनीष के अकाउंट पर मौजूद है, उतनी तल्ख बातें तो कभी भी उनके विरोधियों ने भी उनसे नहीं कही।

तो क्या केजरीवाल के राजनीतिक गुरु का उनके खिलाफ कुछ भी कहना उन्हें BJP के दलाल घोषित करता है। जिसे अन्ना ने बनाया, संवारा उनके बारें में अपना मत कहना अन्ना की इज्जत ले डूबेगा ये तो स्वयं अन्ना ने भी नहीं सोचा होगा।

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