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अखिलेश और मुलायम का अलग होना मोदी के यू पी मिशन के सपने को पूरा कर सकता है , जानिए कैसे ?

Akhilesh Yadav will fulfill the dreams of Modi in UP

नई दिल्ली (रिपोर्ट अड्डा) : आज के तेजी से बदलते घटनाक्रम में सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के आदेश पर शिवपाल ने वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव को पार्टी की सदस्यता से 6 सालों के लिए निष्कासित कर दिया। समाजवादी पार्टी में मचे घमासान की परिणीति के रूप में पार्टी प्रमुख ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पार्टी से 6 साल के लिए निकाल दिया गया। हालिया दौर में वह तीसरे ऐसेे नेता हैं जिनको मुख्यमंत्री रहते पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया हैं। विधानसभा चुनाव से 3 माह पहले चाचा शिवपाल और भतीजे अखिलेश यादव का झगड़ा इतना बढ़ा कि यह बाप-बेटे का झगड़ा बन गया।
शिवपाल ने रामगोपाल यादव पर बीजेपी से सांठगांठ का आरोप लगाया हैं। मुलायम के खेमे में शिवपाल तो अखिलेश के खेमे में रापगोपाल यादव। समाजवादी पार्टी 2 गुटो में बंट चुकी हैं।

इस उठापटक से ना केवल पार्टी के कार्यकर्त्ता बल्कि उत्तर प्रदेश के साथ पूरा देश भी सकते हैं। इस घमासान के बाद उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से बदलने की संभावना हैं। चुनाव के ऐन मौके पर क्या होगा, अभी नहीं कहा जा सकता। अखिलेश सीएम हैं। शिवपाल समाजवादीपार्टी के अध्यक्ष बने हुए हैं। मुलायम पार्टी सुप्रीमो बने हुए हैं। और इनके बीच कुछ भी ठीक नहीं हैं।

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जून से चल रहे समाजवादी घमासान में बीजेपी और बीएसपी को संजीवनी मिलती नजर आ रही हैं। फायदे की रेस में बीजेपी बीएसपी से कहीं आगे नजर आ रही। बीजेपी की एक कमजोरी यहाँ हैं तो बस एक मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी। समाजवादी पार्टी उत्तरप्रदेश में ओबीसी वोटों पर पकड़ रखती हैं। इस टूट का फायदा बीजेपी को हो सकता हैं। खासतौर से सपा की ओबीसी वोटों पर बीजेपी सेंध लगा सकती हैं। पार्टी के 2 गुटों में बंटने से पार्टी के कोर वोटर भ्रमित हैं। सपा के मुस्लिम वोट बसपा की झोली में जा सकता हैं।

असम चुनाव के दौरान भी गैरमुस्लमान वाले जवाबी ध्रवीकरण की रणनीति अपनाई। इससे बीजेपी गठबंधन को फायदा मिला। बीजेपी की इस रणनीति के मारक असर ने विपक्षी दलों की नीदं उड़ा दी। उसी का नतीजा हैं कि यूपी चुनाव में धर्मनिरपेक्ष पार्टियां हिन्दुओं को लुभाने में लगी हैं। काउंटर पोलराइजेशन की पॉलिसी हर पार्टी अपना रही।

बीजेपी विकास के मसलों के साथ जाति के मुद्दे को उठाएगा। लेकिन, उसका मास्टर स्ट्रोक संघ परिवार के साथ मिलकर हिंदुत्व राजनीति को उभारना ही होगा। बीएसपी और एसपी जैसे दलों को हिंदुओं के ध्रुवीकरण का भय बना रहेगा।
महागठबंधन के बनने की कवायद भी अधूरी रह गई। जो बीजेपी के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती थीं।महागठबंधन की जगह सभी पार्टियों का अलग-अलग चुनाव लड़ना बीजेपी के हित में हैं।

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