सिद्धू-कुमार विश्वास

नई दिल्ली (रिपोर्ट अड्डा): देश की राजनीति में नोटबंदी के बाद उथल-पुथल मची हुई है। केंद्र सरकार ने काले धन के खिलाफ एक्शन के तहत 1000 और 500 के नोटल बंद क्या किए कुछ नेताओं की नींद ही उड़ गई। इनमें सबसे प्रमुख हैं अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी। साथ ही मायावती भी हैं। जिनकी राजनीति के दामन पर पैसे लेकर टिकट बेचने के आरोप के दाग लगे हुए हैं। नोटबंदी के साथ ही नेताओं का असली रंग भी दिखने लगा है। पंजाब से लेकर दिल्ली तक नोटबंदी के कारण सियासी प्राथमिकताएं बदल रही हैं। सबसे पहले बात करते हैं नवजोत सिंह सिद्धू के बारे में।

बीजेपी से इस्तीफा देने के बाद इस बात की संभावना प्रबल थी कि सिद्धी आम आदमी पार्टी का दामन थामेंगे। लेकिन ऐसा हो न सका। सिद्धू और आप के बीच बातचीत सिद्धू की महत्वकांक्षाओं की भेंट चढ़ गई। दूसरा ये बात भी है कि आप में केजरीवाल के अलावा कोई और नेता हो नहीं सकता है। सिद्धू केवल शोपीस बनकर रहने वाले नेता नहीं हैं। ऐसे में उनका पास दूसरे विकल्प के तौर पर कांग्रेस थी। आखिरकार ये फैसला सिद्धू ने कर ही लिया। वो कांग्रेस के लिए प्रचार करेंगे। पंजाब की सियासत में ये बड़ी घटना है। देखना होगा कि सिद्धू का प्रचार कांग्रेस को कितना फायदा पहुंचाता है।

अब बात करते हैं आप के कविराज कुमार विश्वास के बारे में। काले धन के खिलाफ मोदी सरकार की कार्रवाई से अरविंद केजरीवाल जिस तरह से भिन्नाए हुए हैं वो कुमार को खल रहा है। कुमार विश्वास कैसे भूल सकते हैं कि ये वही केजरीवाल हैं जो जंतर-मंतर से काले धन और भ्रष्टाचार को लेकर बड़ी-बड़ी बातें किया करते थे। लेकिन अब केंद्र सरकार ने काले धन के खिलाफ कार्रवाई की तो केजरीवाल बिदक गए। उनका ये रवैया कुमार विश्वास को अखरने लगा है। यही कारण है कि कविराज कई दिनों से आप के किसी कार्यक्रम में दिखाई नहीं दिए। यहां तक कि नोटबंदी के खिलाफ केजरीवाल के विरोध प्रदर्शन से भी उन्होंने दूरी बना रखी है।

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ऐसे में इस बात की प्रबल संभावना दिख रही है कि कविराज बीजेपी के पाले में आ सकते हैं। ये किसी से छुपा नहीं है कि कुमार विश्वास नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हैं। वो कई मौकों पर पीएम मोदी की तारीफ भी कर चुके हैं। ऐसे में ये सही समय है उनके लिए कि वो केजरीवाल का साथ छोड़कर बीजेपी के साथ आ जाएं। इस से पहले भी विश्वास को लेकर इसी तरह की चर्चाएं उठी थी। दरअसल विश्वास राज्यसभा की टिकट आप से चाह रहे हैं। लेकिन वो चाहत पूरी होती नहीं दिख रही है। ऐसे में कुमार विश्वास अगर बीजेपी के पाले में आते हैं। तो सिद्धू की खाली राज्यसभा सीट उन्हे मिल सकती है।

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