धार्मिक

पैसे के पीछे कहां तक गिरेगा इंसान ?

paise ke kaaran gira insaan.

धन के के पीछे भागते भागते इंसान कब इंसान से मशीन बन जाता है उसे ये समझ ही नही आता है , जहाँ उस के अंदर से रिस्ता, समाज, अपना, पराया, कुछ याद नही रह जाता है अगर कुछ याद रहता है तो बस उस की धन को कमाने की लालच जिस में वह यह भूल चुका होता है कि सही क्या है गलत क्या है
आज सब से ज्यादा वृद्धा आश्रम बड़े शहरो में बन रहा है जैसे दिल्ली , मुम्बई , बैंगलोर , कोलकाता, जैसे शहरों में ।
कभी सोचे हो की क्यू हो रहा है ऐसा उन शहरो में रहने वाले वृद्धा आश्रम में सब से ज्यादा बड़े घराने के लोग मिलते है जिन के पास धन की कोई कमी नही है , आखिर ऐसा क्या है जो बड़े घराने के लोगो को वृद्धा आश्रम में रहने की जरूरत पड़ गई है ?

मैंने ऊपर चर्चा किया है कि लोग धन ले पीछे इतने शिद्दत से भागते जा राहे है कि उन पता ही नही चलता है कि वह इंसान से मशीन कब बन गए । जब इंसान मशीन बन जायेगा तो उसे क्या फर्क पड़ता है कि उस को जन्म देने वाले माँ बाप कैसे है क्या खाते है कैसे जी रहे , उन को क्या तकलीफ है ।
उस की सही गलत में फर्क करने की सोचने की सकती तो जा चुकी होती है क्यू की मशीन बस काम कर सकता है उसे बस अपने को ऊर्जा बाण बनाये रखने के लिए अपने ईंधन के बारे में सोचने की शाक्ति शेष रह रह जाती है ।
इंसानियत से जुडी बाते उस के जेहन में आ ही नही सकती क्यू की वह तो मशीन बन चुका है उसे क्या मतलब है कि कोई जिए या मरे उसे तो बस अपने आप से मतलब है ।

उस के लिए यह कोई मायने नही रखता की उस को 9 महीने अपने उदर में रखने वाली माँ और जन्म के बाद उसे पाल पोष कर बड़ा करने वाले माँ और बाप की भी उस से कोई उम्मीद संजोए होंगे उन की भी कई आशाएं होंगी ।
मैं नही कहता की धन कमाना बुरी बात है लेकिन धन के पीछे उनता ही भागो जितने में की तुम अपने पीछे अपने परिवार और समाज से इतने दूर ना चले जाओ जहां से जब पीछे लौटने की सोचो तो तुम्हे पीछे कोई नजर ही नही आये ।

मेरे पापा ने मुझ से कहा था बेटा धन के पीछे इतना ही भागना जितने तुम सुख और शांति से रह सको , इतना मत भागना की धन के पीछे भागते भागते तुम ये ही भूल जाओ की तुम इंसान भी हो और उस का कुछ कर्म भी होता है ।
मैंने कही पढ़ा था उस का ज़िक्र करना याजा आवश्यक है ।

एक बच्चा अपने पिता से पूछता है पापा पापा जीवन क्या है ?

तो उस के पापा ने उस बच्चे से कहा इस का जबाब समय आने पर दूंगा । और उस बच्चे के पिता यह सोचने लगे की आखिर इस को इस का जीवन का अर्थ किस भाषा में समझाऊं की वह जीवन में कभी उस को भूल ना पाए ।

ऐसे ही एक दिन आसमान में बहुत सारे पतंग उड़ रहे थे उस दिन वह पिता घर में होता है बच्चे के साथ उस के बच्चे ने उसे आ कर बोला पापा पापा देखो ने आज बहुत सारा पतंग उड़ रहा है मुझे भी पतंग उड़ाना है चलिये न- चलिये न मेरे साथ ।
वह अपने बच्चे के साथ ऊपर छत पर जाता है और बच्चे के साथ पतंग उड़ाने लगता है बच्चा यह देख कर बहुत खुश होता है कि उस का पतंग बहुत ऊपर उड़ रहा है सब से ऊपर उस के मन में पतंग को और ऊपर उड़ाने की इच्छा होती है वह अपने पिता को बोलता है कि पापा पापा पतंग को और ऊपर उड़ाओ और ऊपर उड़ाओ , बच्चे का पिता कहता है कि बेटा अब ज्यादा ऊपर उड़ाने से कोई फायदा नही है जहाँ तुम हो वहां तो कोई नही है न लेकिन बच्चा इस बात को नही समझता है और ऊपर उड़ाने की जिद्द करता है पिता उस बच्चे की जिद्द के आगे हार मान लेता है और पतंग में और ढ़ील देता है ऊपर हवा वहुत तेज़ होती है जिस कारण पतंग की डोर टूट जाती है कुछ दूर से लेकिन पतंग काफी ऊपर चला जाता है जिस से बच्चा बहुत खुश होता है पापा देखो पतंग कितना ऊपर चला गया आप अगर धागा पहले तोड़ देते तो अभी और ऊपर उड़ता मेरा पतंग ।

तभी कुछ देर बाद वह पतंग हवा में बहता हुआ गिरने लगता है और बच्चा उस को देख कर दुखी होता है और पापा से कहता है पापा मेरे पतंग को गिरने से बचाओ न देखो वह नीचे गिर रहा है , तब उस बच्चे के पिता ने अपने बेटे को समझाते हुए कहता है बेटा हम किसी पतंग को तभी तक उड़ा सकते है या उसे नीचे गिरने से बचा सकते है जब तक की उस की डोर अपने हाथ में हो ।

तुम उस दिन पूछ रहे थे न की जीवन क्या है तो मेरे बच्चे यही जीवन है वह जो पतंग है तो हमारा जीवन है और इस को सँभालने वाली वाली डोर हमारा रिस्ता है जो एक दूसरे को एक दूसरे से बांधे रखती है जीवन में ऊंचाई पर जाना लेकिन इतनी ऊंचाई पर मत जाना जहाँ जाने में तुम्हारा यह धागा ही टूट जाये अगर धागा टूट गया जिस तरह से उस पतंग को गिरने से हम दोनों नही बचा पाए इस तरह उस समय तुम को कोई नही बचा पायेगा ।
इतना सुनते ही बच्चा अपने पापा के गले से लिपट जाता है और कहता है पापा आज मुझे समझ में आ गया कि जीवन क्या है और उस का सार क्या है ।
तो हे इंसान तुम भी इतना ही धन के पीछे भागो जितना की जरूरत हो अगर उस से आगे बढ़ो गे तो सायद पीछे सब छूट जाएगा ।
यह मेरे विचार है , हो सकता है आप कुछ सोचते हो
ऐसे सोचने की सब को आज़ादी है, है न ।

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